मिट रही हाथों की लकीरें, दफ्तरों में पहचान साबित करना मुश्किल

भोपाल। कहते हैं कि हाथों की लकीरों में तकदीर लिखी होता है। अब इन्हीं लकीरों पर खतरा मंडरा रहा है। ये रेखाएं मिट रहीं हैं। इसके कारण लोगों को दफ्तरों में बायोमैट्रिक उपस्थिति से लेकर फिंगर प्रिंट से जुड़ी पहचान साबित करना मुश्किल हो गया है। आधार कार्ड बनवाने से लेकर बैंकों में खाता खुलवाने तक में दिक्कत आ रही है। ऐसा त्वचा रोग टीनिया मेनन (फंगल इंफेक्शन), स्कैबिज व पामर सोरेसिस की वजह से हो रहा है। डॉक्टर ऐसे रोगों से पीड़ित मरीजों को उनके साथियों से हाथ मिलाने की बजाय नमस्ते करने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि टीनिया मेनन व स्कैबिज रोग का हाथ मिलाते समय एक से दूसरे को फैलने का खतरा रहता है, जबकि पामर सोरेसिस रोग एक से दूसरे में नहीं फैलता।
इधर, त्वचा रोग विशेषज्ञ हाथों की लकीरें मिटने की एक वजह फिंगर प्रिंट एग्जिमा नामक रोग को भी मानते हैं। यह अंगुली से शुरू होकर दोनों हाथों की सभी लकीरों को मिटा देता है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट एंड वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट मप्र शाखा के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. अनिल दसोरे का कहना है कि हाथों की लकीरों से जुड़े रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। टीनिया मेनन व स्कैबिज रोग हाथ मिलाते समय दूसरों में भी फैल जाता है, लेकिन इलाज के बाद ठीक भी हो जाता है। इसमें हाथों की लकीरें मिटने का ज्यादा खतरा नहीं होता। ऐसी स्थिति में मरीजों को हाथ न मिलाने की सलाह दे रहे हैं। वहीं पामर सोराइसिस नामक त्वचा रोग में हमेशा के लिए हाथों की लकीरें मिटने का खतरा ज्यादा रहता है। यह हाथ मिलाने से दूसरों को नहीं फैलता।इसमें हथेलियों में पाई जाने वाली एपिडर्मिस व डर्मिस सतह सामान्य से मोटी हो जाती है। इसके कारण लकीरें मिट जाती हैं और फिंगर प्रिंट से पहचान साबित करने में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।
पहचान बचाना मुश्किल
डॉ. अनिल दसोरे ने अनुमान जताया है कि इस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत है। वे बताते हैं कि ऊंगलियों के निशान न आने के कारण लॉकर, बैंक, ऑफिस और ऐसी ही अन्य जगहों पर काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। आधार कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। वे कहते हैं कि बचाव का सबसे आसान तरीका यही है कि जैसे ही हथेलियों में कोई बदलाव नजर आते ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए
शहर में तेजी से बढ़ रहे मरीज
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित सोनी का कहना है कि भोपाल में टीनिया मेनन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह एक तरह का फंगल इंफेक्शन है जो हथेलियों के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों में भी हो सकता है। बिना साफ किए कपड़े उपयोग करने जैसे कारणों से यह रोग फैल रहा है। स्टेरॉयड भी इस रोग की वजह हैं। उनकी ओपीडी में इस बीमारी से पीड़ित 10 से 15 मरीज रोज पहुंच रहे है।
बचने के लिए नमस्ते करिए
हाथ मिलाते समय एक से दूसरे को फैलने वाले रोग से बचने के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ हाथ मिलाने की बजाए दूर से नमस्ते करने की सलाह दे रहे हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मोटालजिस्ट के सदस्य व डॉ. विकास ने बताया कि उन्होंने अपने हॉस्पिटल को शेकहैंड फ्री जोन डिक्लेयर किया है। क्योंकि हाथों से जुड़ी स्किन प्रॉब्लम हाथ मिलाते से तेजी से बढ़ता है। इसलिए अभिवादन के नमस्ते करने की सलाह दी जा रही है।
इन बीमारियों से भी बचने की जरूरत
पामर सोरेसिस, टीनिया मेनन (फंगल इंफेक्शन), स्कैबिज व फिंगर प्रिंट एग्जिमा के साथ ही कायरोपाम्फोलिक्स नामक रोग से भी बचने की जरूरत है। कुछ त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों के शुरूआती दौर में हाथों में खुजली, लालपन, पानी वाले दानें निकलना, डार्कनेस, हथेली में कड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टरों की मदद लेनी चाहिए।
