कॉलेज के लड़के की भूमिका में नजर आयेंगे टाइगर श्रॉफ

अब तक ऐक्शन हीरो और पारंगत डांसर की इमेज रखने वाले अभिनेता टाइगर श्रॉफ करण जौहर के प्रॉडक्शन की 'स्टूडेंट ऑफ द इयर 2' में छात्र के रूप में नजर आएंगे। टाइगर श्रॉफ ने कहा कि इसमें उसे एक कॉलेज के लड़के जैसे दिखाने के लिए (निर्देशक) पुनीत मल्होत्रा और (कॉस्ट्यूम डिजाइनर) मनीष मल्होत्रा ने लुक पर ध्यान दिया। उन्होंने देखा कि आजकल के लड़के किस तरह की डेनिम जींस या टीशर्ट पहनते हैं। धर्मा प्रॉडक्शन होने के नाते उन्हें ग्लैमर और ग्लॉस भी रखना था। उन्होंने बॉडी लैंग्वेज पर भी काम किया। मैंने अपनी एक्सारसाइजवाली बॉडी को डायट से पतला किया। मैंने अपनी डायट पर काफी काम किया। मुझे माचो मैन नहीं बल्कि लड़का दिखना था। मैंने अपने मसल्स लूज किए। देखिए, मैं तो कभी कॉलेज गया ही नहीं हूं। मुझे तो स्कूल के बाद ही हीरोपंथी मिल गई थी, मैंने तो कॉलेज देखा नहीं था। यही वजह थी कि मैंने खुद को पूरी तरह से पुनीत सर के हवाले कर दिया था। इस फिल्म के जरिए मैं अपनी कॉलेज लाइफ को जी पाया।
इस बार मुझे एक अलग तरह की भूमिका करने का मौका मिला। इसका पूरा श्रेय पुनीत सर और करण सर को देना चाहूंगा। जब मैं बागी कर रहा था, एक दिन करण सर ने मुझे अपने ऑफिस बुलाया। पहली मीटिंग में तो उन्होंने मुझसे पूछा कि मुझे किस तरह की फिल्में पसंद हैं। वहीं दूसरी मीटिंग में उन्होंने मुझसे कहा कि मैं स्टूडेंट ऑफ द इयर 2 का हिस्सा क्यों नहीं बन जाता। मैं हैरान होने के साथ-साथ खुश भी था, मैंने उनसे पूछा कि सर क्या वाकई आप मुझे लेना चाहते हैं क्योंकि ये वरुण, सिद्धार्थ और आलिया की फिल्म है। उन्होंने कहा, 'बिलकुल। वरुण, आलिया, सिद्धार्थ फिल्म कर चुके हैं और वे ग्रेजुएट भी हो चुके हैं।
बचपन में तो मैं बहुत शरारती था। स्कूल डेज में गुस्सा आने पर लोगों को काटने लगता था, मगर मैं स्पोर्ट्स में कलाकार था। असल में मैं स्पोर्ट्स के कारण ही स्कूल जाता था। स्पोर्ट्स के कारण मैं स्कूल का हीरो हुआ करता था। हर साल मुझे स्कूल में स्पोर्ट्समैन ऑफ द इयर का अवॉर्ड मिलता था। यही वजह है कि मैं फिल्म से भी खुद को जोड़ पाया हूं, क्योंकि इसमें मेरा किरदार कबड्डी की ट्रॉफी के लिए कंपीट कर रहा है।
फिल्म कबड्डी जैसे स्पोर्ट्स पर आधारित है, तो क्या आपने कबड्डी की ट्रेनिंग ली?
जैसा कि मैंने बताया कि मैं स्पोर्ट्स का दीवाना हूं और मुझे इस फिल्म में कबड्डी खेलने का मौका मिला। कबड्डी जैसे स्पोर्ट्स के लिए ऑथेंटिक बॉडी लैंग्वेज की भी खूब तैयारी की मैंने। देखने में कबड्डी बहुत आसान लगती है, मगर उसमें बहुत स्टेमिना लगता है। वह मेरे लिए फिजिकल और टैक्निकल दोनों नजरिए से बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा।
जब भी मैं स्टंट या ऐक्शन सीन्स करता हूं, मॉम-डैड घबरा जाते हैं। वे अक्सर मुझे हिदायत देते हैं कि जरूरी न हो, तो करने की जरूरत नहीं है। आजकल टेक्नॉलजी इतनी अडवांस हो चुकी है कि आप बड़े परदे पर कुछ भी चीट कर सकते हो, मगर मेरी कोशिश यही होती है कि अपने ऐक्शन दृश्यों को करते हुए वे झूठे न लगें। मैं ऐक्शन दृश्यों को करते हुए उसके डर या हादसे के बारे में जितना कम सोचूं, उतना मेरे लिए अच्छा है। जब आप इस तरफ सोचने लगते हैं, तो उससे आपके मन में एक डर पैदा होता है और उस डर के कारण आप अपनी ऊर्जा को होल्ड बैक कर लेते हो। आपका वह डर परदे पर दिख जाता है। आजकल दर्शकों की नजर बहुत पारखी हो गई है। मैं जितने भी ऐक्शन दृश्य करता हूं, अपनी इंस्टिक्ट के साथ करता हूं, इस यकीन के साथ कि सेट पर मेरी ऐक्शन टीम अपने हिसाब से सेफ्टी मेजर्स ले चुकी है और मुझे अपना काम करना है।
मॉम मेरे लिए बहुत सपॉर्टिव रही हैं। वह मेरा बहुत बड़ा सपॉर्ट सिस्टम हैं। मैं जो भी करता हूं, उनको अच्छा ही लगता है। मैं उनका फीडबैक लेता हूं। मैं जानता हूं कि मॉम मेरे प्रति बहुत प्यार-दुलार रखती हैं, मगर मैं अपनी बहन कृष्णा की प्रतिक्रिया को बहुत गंभीरता से लेता हूं, क्योंकि वह मुझे हमेशा बहुत ही ऑनेस्ट फीडबैक देती है। स्टूडेंट ऑफ द इयर का लुक उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने मुझे कहा कि उनकी उम्मीद से ज्यादा मनोरंजन है। उनका कहना है कि फिल्म का पहले ही अपना मजबूत फैन बेस रहा है और आप उसमें अपना भी फैन बेस जोड़कर इसे रोचक बना रहे हो।
अब मैं अपने घर के सभी बिल्स अदा करने लगा हूं। पूरे स्टाफ की पेमेंट मैं ही देता हूं। पूरे स्टाफ को मैं ही संभालता हूं। मॉम-डैड के लिए मैंने खार में एक घर भी खरीदा है। जब मैंने घर खरीदा, तो मॉम-डैड गर्व से भर गए। उन्हें लगा कि जीवन का चक्र पूरा हुआ। मैं सोचता हूं, मैं उन लोगों के लिए जितना भी करूं, कम ही रहेगा, क्योंकि उन्होंने मुझे जिस नाज और अंदाज से पाला, वह तो बहुत ज्यादा है। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं, जो मुझे ऐसे मॉम-डैड मिले। मैं अपने लिए ही नहीं बल्कि उनके लिए भी काम के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूं और अपनी हर फिल्म से यह साबित करना चाहता हूं कि उन्हें मुझ पर गर्व हो।
पापा और मैं जब भी मिलते हैं, काम की बातें कम, इधर-उधर की बातें ज्यादा करते हैं। हम जिंदगी, फलसफे और सेहत की बातें ज्यादा करते हैं। वह जिंदगी को लेकर बहुत भाषण देते रहते हैं और मुझे भी उनकी बात सुननी पड़ती है।
