वाेटों का प्रबंधन बेहतर करने में जुटे दल, जातिगत गोलबंदी के दम पर किला फतह करने की कोशिश

हाजीपुर  रामविलास पासवान ने इस बार यह सीट अपने छोटे भाई पशुपति कुमार पारस के लिए छोड़ दी है। यहां राजद ने भी लंबे समय बाद अपना प्रत्याशी उतारा है। पहले यह सीट गठबंधन में कांग्रेस के खाते में जाती थी। एनडीए समर्थक कह रहे हैं कि रामविलास पासवान के चुनाव में पशुपति कुमार पारस ही सभी चीजों को मैनेज करते थे। इसलिए वे जीत जाएंगे। लेकिन रामविलास पासवान की तरह उनकी पहचान हाजीपुर में नहीं है। दूसरी ओर महागठबंधन से राजद प्रत्याशी शिवचंद्र राम हैं। स्थानीय नेता के रूप में उनकी पहचान है।

इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 14 फीसदी पासवान वाेटर हैं, जो संख्या बल में दूसरे नंबर पर है। वहीं एनडीए के प्रत्याशी होने के चलते इनके पास भूमिहार, ब्राह्मण, वैश्य, कायस्थ वोटर, अति पिछड़ा और राजपूतों के वोट हैं। ये वोट एनडीए के आधार हैं, जिसके दम पर एनडीए पिछले चुनाव में जीता था। सवर्ण इस बार मोदी फैक्टर की वजह से वोट करते हैं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। अभी इस पर चुप्पी है। वहीं लोजपा के बागी पूर्व सांसद रामा किशोर सिंह लगातार लोजपा के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। लोजपा समर्थकाें के अनुसार रामा सिंह से ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला। अगर राजपूतों के साथ सवर्णों के वोट में बिखराव हुआ तो लोजपा के लिए मुश्किल होगी। शिवचंद्र राम रविदास जाति से आते हैं। यहां इनकी जाति के लगभग 1 लाख वोटर हैं। यहां सबसे ज्यादा यादव वोटर हैं, जो  राजद का सबसे बड़ा वोट बैंक है। महागठबंधन का दावा है कि यादव और मुस्लिम वोटर पूरी तरह महागठबंधन के साथ हैं।  

एनडीए का जोर राष्ट्रवाद पर, महागठबंधन का सामाजिक न्याय पर

पशुपति कुमार पारस, लोजपा: लोजपा सुप्रीमो व भारत सरकार के मंत्री  राम विलास पासवान के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस फिलवक्त बिहार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री है। पारस विधानसभा, विधान परिषद दोनों के सदस्य रहे हैं।

शिवचंद्र राम , राजद: राजापाकर सुरक्षित विधानसभा से 2015 में एमएलए। फरवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में लोजपा प्रत्याशी मीना देवी को हरा कर पहली बार विधायक चुने गए। अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में भी शिवचंद्र राम ने जेडयू के दसई चौधरी को पराजित किया था।

पासवान का रहा है क्षेत्र

हाजीपुर सीट कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह वही सीट है जहां से कभी रामविलास पासवान ने दो बार विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसी सीट से रामविलास पासवान को दो बार हार का सामना भी करना पड़ा था। फिलहाल रामविलास पासवान जिन विरोधी पार्टियों से हारे, वे अभी उनके गठबंधन में हैं। लोग यह भी देखना चाहते हैं कि रामविलास पासवान के नाम पर ही क्या जनता उनकी पार्टी को हाजीपुर में जीत दिलाएगी? 

अपनों के भितरघात की आशंका

इस बार के चुनाव में एक बड़ा ही दिलचस्प पहलू सामने आया है। इसबार विरोधी से ज्यादा अपने लोग ही अपने प्रत्याशी को हराने की फिराक में हैं। राजद में भी इस बार कई गुट हैं। कांग्रेस के भी कई नेता नाराज चल रहे हैं। एनडीए की पहली बैठक में ही गठबंधन के दो दल बीजेपी और जदयू आपस में उलझ गए। विवाद का कारण था प्रचार में जाेर प्रधानमंत्री माेदी पर हाे या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर। अपने-अपने मंच पर एनडीए और महागठबंधन के लोग साथ होते हैं लेकिन मंच से उतरते ही एक दूसरे के लिए गढ्‌ढा तैयार करते नजर आ रहे हैं।

नए विकल्प तलाश रहीं जातियां

नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही कुशवाहा के वोट पर अपना दावा करते रहे हैं। हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में कुशवाहा का कुल वोट 1 लाख 25 हजार है। अगर वोटिंग प्रतिशत 55 के करीब होता है तब इनका 68 हजार 750 वोट किस पार्टी को मिलेगा? हालांकि यह एक ही पार्टी को जाए यह दावा से ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। वहीं इस लोकसभा क्षेत्र में अति पिछड़ा का 2 लाख वोट है। इस वोट पर भी नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव अपना-अपना दावा करते रहे हैं। वहीं इस बार राजपूत, कुशवाहा जातियों के भी अपने पहले से तय खेमे को छोड़कर नया खेमा में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।
 

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