संस्कार ही संस्कृति, समाज और सभ्यता का सृजन करते हैं : आचार्य डॉ. गोकुलोत्सव महाराज 

इन्दौर । संस्कार शिविर जीवन के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाकर हमें धर्म, राष्ट्र, समाज और संस्कृति से जोड़ते हैं। संस्कृति और संस्कारों के अभाव में ही मनुष्य पशु की श्रेणी में रखा जाता है। हमारा प्रत्येक कार्य तभी शिष्ट और सभ्य माना जाता है, जब हम उसे अपने सनातन सिद्धांतों के आधार पर मूर्त रूप प्रदान करेंगे। संस्कार ही संस्कृति, समाज और सभ्यता का सृजन करते हैं। 
पद्मश्री एवं पद्मभूषण से अलंकृत, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आचार्य डॉ. गोकुलोत्सव महाराज ने आज मालगंज चौराहा स्थित दशा नीमा धर्मशाला पर आयोजित हिंदू वैष्णव धर्म संस्कार शिविर में मौजूद साधकों को संबोधित करते हुए अपने आशीर्वचन में उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। शिविर में गोस्वामी बृजोत्सवजी एवं उमंगरायजी भी उपस्थित थे। तीन दिवसीय इस शिविर का समापन रविवार 5 मई को होगा। आचार्यश्री ने शिविर में भाग ले रहे साधकों को समझाया कि उन्हें अपना जीवन किस पद्धति से जीना चाहिए और अपने खाने, पीने, सोने और व्यवहार के तरीके कैसे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे रीति-रिवाज, परंपराओं और त्यौहारों का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व भी है। संस्कार ही हमारे चरित्र का निर्माण करते हैं। धर्म हमारे समाज की वास्तविक शक्ति है। धर्म की पात्रता केवल मनुष्य को है। धर्म और संस्कृति से ही मनुष्य की श्रेष्ठता का निर्धारण होता है। प्रारंभ में डॉ. प्रमोद नीमा, पंकज नीमा, जयकृष्ण गुप्ता, प्रकाशचंद्र नीमा आदि ने आचार्यश्री का स्वागत किया। संचालन जयकृष्ण नीमा ने किया। शिविर में बड़ी संख्या में महिला पुरूष एवं युवा भाग ले रहे हैं। रविवार को सांय 5.30 से 7 बजे तक समापन सत्र होगा।

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