अतिक्रमण के कारण कलियासोत नदी खतरे में

भोपाल । राजधानी के कोलार क्षेत्र में बहने वाली कलियासोत नदी का अस्तित्व खतरे में है। नदी किनारे पर पहले मल्टियां बनी और अब झुग्गियां तन रही हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिम्मेदारों ने इन अतिक्रमणों को लेकर जानबूझकर आंख मूंद रखी है। कोलार दामखेड़ा ए व बी सेक्टर की ओर नदी किनारे झुग्गियों का निर्माण जारी है। यह स्थिति तब है, जब हर साल बारिश होने पर कलियसोत नदी में पानी बढ़ने से किनारे पर बनीं झुग्गियों में बाढ़ के हालात बनते हैं। तेज बारिश होने पर बाढ़ भी आ जाती है। बारिश के मौसम में कलियासोत नदी किनारे रहने वाली 20 से 25 हजार की आबादी प्रभावित होती है। बावजूद इसके कलियासोत नदी पर बनी झुग्गियां हटा कर दूसरी जगह शिफ्ट करने में जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसर गंभीरता नहीं दिखाते। एनजीटी के आदेश के मुताबिक कलियासोत नदी के 33 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कैचमेंट एरिया में झुग्गियां 10 सालों से बन रही हैं। बाढ़ आने पर जिला प्रशासन नगर निगम के सहयोग से दामखेड़ा ए व बी सेक्टर में झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई करता है, लेकिन झुग्गियों को कहीं दूसरी जगह स्थाई रूप से शिफ्ट नहीं किया जाता। इससे बारिश बाद फिर से झुग्गियां तन जाती हैं।
यहां बता दें कि 80 से ज्यादा झुग्गियां दामखेड़ा ए सेक्टर में कलियासोत नदी के किनारे, 70 से ज्यादा झुग्गियां दामखेड़ा बी सेक्टर में नदी से लगी हुई, 50 झुग्गियां सनखेड़ी में नदी के किनारे, 40 झुग्गियां बांसखेड़ी नदी के कैचमेंट एरिया में में बन रही है। कलियासोत नदी के कैचमेंट एरिया में बनने वाली झुग्गियों में वर्ष 2013,2016-17 में बारिश के समय पानी भर गया था। बाढ़ के हालात बन गए थे। ननि फायर अमल अब तक एक दर्जन लोगों को बाढ़ के कारण कलियासोत नदी में डूबने से बचा चुका है। वहीं साल 2013 में एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। इस बारे में एसडीएम हुजूर राजकुमार खत्री का कहना है कि इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। कोलार दामखेड़ा कलियासोत नदी के किनारे से पहले भी अतिक्रमण हटाया गया है। एक बार फिर से जांच कराई जाएगी कि कलियासोत नदी के कैचमेंट एरिया में कहां कितना अतिक्रमण है।
