अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस पर 12 मई को होगी प्रादेशिक संगोष्ठी

इन्दौर । मध्यप्रदेश थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाती है। इसी कड़ी में सोसायटी मध्यप्रदेश थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी द्वारा 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय थैलीसीमिया दिवस वैचारिक आयोजन के साथ मनाया जाएगा।
म.प्र. थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया रोकथाम एवं उपचार विषय पर 12 मई को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक आरएनटी मार्ग स्थित होटल अप्सरा पर प्रादेशिक संगोष्ठी होगी। अगले दिन 13 मई को सुबह 11:00 बजे से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन नंदानगर स्थित रिंकू शर्मा थैलीसीमिया चैरिटेबल हॉस्पिटल पर होगा। अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस पर प्रादेशिक संगोष्ठी में वरिष्ठ डाक्टरों का संबोधन भी होगा। जिसमें शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदन शाह, डॉ. उल्लास महाजन और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. नैयर थैलीसीमिया की जानकारी देने के साथ ही उपचार और उससे जुड़ी बारीकियों पर विचार व्यक्त करेंगे। 12 मई को प्रादेशिक संगोष्ठी का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक वरुण कुमार कपूर करेंगे। अतिथि के रूप में सेल टैक्स विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. आर.के. तिवारी, पीएचई के मुख्य अभियंता दीपक रत्नावत, स्वास्थ्य विभाग के पूर्व संयुक्त संचालक डॉ. शरद पंडित, लायंस क्लब की अध्यक्ष श्रीमती मनी जोशी होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग के सिविल सर्जन डॉ. एम.पी. शर्मा करेंगे। समाज सेविका स्व. श्रीमती विमला देवी तिवारी की स्मृति में तिवारी परिवार की ओर से थैलीसीमिया हॉस्पिटल को डिस्प्राल पम्प भी भेंट किए जाएंगे। समाज सेविका श्वेता खनूजा द्वारा थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को उपहार भी दिए जाएंगे।
:: क्या है थैलेसीमिया ::
देश में पांच करोड़ से ज्यादा लोग थैलेसीमिया से पीड़ित हैं और प्रत्येक वर्ष 10 से 12 हजार बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं। हालांकि इन भयावह आंकड़ों के बावजूद इस गंभीर बीमारी को लेकर लोगों के बीच जागरूकता की कमी है। लेकिन जीन थेरेपी इस रोग के लिए कारगर साबित हो सकती है। इस रोग में शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है जिसके चलते रक्तक्षीणता के लक्षण पैदा हो जाते हैं। बीटा चेंस के कम या बिल्कुल न बनने के कारण हीमोग्लोबिन गड़बड़ाता है। जिस कारण स्वस्थ हीमोग्लोबिन जिसमें 2 एल्फा और 2 बीटा चेंस होते हैं, में केवल एल्फा चेंस रह जाते हैं जिसके कारण लाल रक्त कणिकाओं की औसत आयु 120 दिन से घटकर लगभग 10 से 25 दिन ही रह जाती है। इससे प्रभावित व्यक्ति अनीमिया से ग्रस्त हो जाता है। इसमें रोगी के शरीर में खून की कमी होने लगती है जिससे उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
