हाथियों ने बदल लिया अपना रूट, इससे हो रहा ये बड़ा फायदा

कोरबा। हाथियों के दल ने बाल्को वन परिक्षेत्र में नया रूट तैयार कर लिया है। हाथी अब वन मंडल कटघोरा से माचाडोली पाथा होते हुए कोरबा वनमंडल के बाल्को परिक्षेत्र पहुंचते हैं। इसकी वजह से ही वर्ष 2018-19 में फसल क्षति का आंकडा कम हो गया हैं वर्ष 2017-18 में फसल क्षति के 3859 प्रकरण बने थे, लेकिन इस बार 2255 प्रकरण बने हैं।
इसका मुख्य कारण हाथियों का कटघोरा की ओर मूवमेंट बढ़ना है, लेकिन 18 साल से सबसे अधिक वर्ष 2018-19 में ही हाथियों ने 9 लोगों को कुचलकर मार डाला। अब तक मौत का आंकडा 59 पहुंच गया है। जिले में हाथियों का प्रवेश वर्ष 2000 में कुदमुरा परिक्षेत्र से हुआ था। इसके बाद से हाथी लगातार आ रहे हैं। अब तो महीनों तक जंगल में ही रहकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
पहले वन परिक्षेत्र बाल्को के दोदरो चुईया, नरबदा होते हुए हसदेव नदी पार कर कटघोरा वनमंडल चले जाते थे। कई हाथियों का झुंड रिस्दी से वापस लौट जाता था। पहली बार हाथियों का दल कटघोरा वनमंडल से माचाडोली, पाथा होते हुए हसदेव नदी पार कर कोरबा वन मंडल में प्रवेश किया। अब तक हाथी इस रास्ते में नहीं आए थे।
लगातार हाथियों के घूमने का दायरा बढ रहा है। लामपहाड में बांस के पौधे अधिक हैं। जिसे हाथियों का प्रिय भोजन माना जाता है। पानी के लिए नदी, नाले के किनारे पहुंचते हैं। लामपहाड के निकट ही गौर बोरा, सरईसिंगार, पोडीखोहा, कढकटरा, माखुरपानी गांव है। पहाड़ में भी पहाड़ी कोरवाओं की बस्ती है।
