यहां भी बहुत खास मुकाबला, चेले को टक्कर देने के लिए गुरु को बहाना पड़ रहा पसीना

हरियाणा और राजस्थान के साथ ही पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे लोकसभा क्षेत्र फिरोजपुर में मुख्य रूप से मुकाबला सीधा-सीधा सिर्फ दो पार्टियों शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेसमें है। शिअद से पार्टी अध्यक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल मैदान में हैं, जबकि उन्हें टक्कर देने के लिए सामने भी अकाली दल से दो माह पहले कांग्रेस में गए मौजूदा सांसद शेर सिंह घुबाया हैं। घुबाया ने सुखबीर से ही राजनीति के दावपेंच सीखे हैं। अब अपने गुरु को भरी गर्मी में पसीना बहाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
जिस समुदाय ‘राय बिरादरी’ से वह आते हैं, उसका क्षेत्र में प्रभाव ज्यादा है। शिरोमणि अकाली दल राय सिख बिरादरी को अपने पक्ष में करने के लिए जोड़तोड़ का खेल खेल रहा है। राय सिख बिरादरी के लोगों को व्यक्ति विशेष की तरफ देखने की बजाय पार्टी के साथ जुड़े रहने के तर्क दिए जा रहे हैं।
सरकार के खिलाफ अध्यापकों का ‘मिशन ट्यूशन’
लोकसभा चुनाव में पंजाब सरकार के कर्मचारियों का एक बड़ा तबका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि अध्यापक चार-चार की टोलियां बनाकर गुप्त तरीके से घर- घर जाकर लोगों को कांग्रेस सरकार के खिलाफ ट्यूशन पढ़ा रहे हैं। अगर अध्यापक अपने मिशन में कामयाब हो गए तो कांग्रेस को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
फाजिल्का-जलालाबाद, फिरोजपुर में शिअद का गढ़ भेदना कांग्रेस के लिए चुनौती
बड़े शहरों में अबोहरको छोड़ कर फाजिल्का, फिरोजपुर, जलालाबाद, मुक्तसर आदि में शिरोमणि अकाली दल के गढ़ को भेदना कांग्रेस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अबोहर में भी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल में कांटे की टक्कर है। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ के अपने ही क्षेत्र में पार्टी की स्थिति कुछ ठीक नहीं है। अपनी ही पार्टी के लोग अंदरखाने विरोध कर रहे हैं। शायद विधानसभा चुनावों में जाखड़ भी इसी वजह से हारे थे। फाजिल्का से विधायक दविंदर सिंह घुबाया जो कि कांग्रेस प्रत्याशी घुबाया के बेटे हैं, उनको छोड़कर क्षेत्र के लगभग सभी विधायक और पूर्व विधायक घुबाया के विरोध में हैं।
राय सिख का फैक्टर
जलालाबाद और अबोहर व फाजिल्का में राय सिखों की संख्या ज्यादा है। यहबिरादरी जिस किसी के भी पक्ष में चलती है, तो इकट्ठी ही चलती है। बिरादरी के बहुत कम लोग ऐसे हैं जो समुदाय से छिटक कर दूसरी जगह पर वोट करें। हालांकि, यदि मत प्रतिशत देखें तो यह बिरादरी सिर्फ साढ़े बाइस फीसद है, जबकि हिंदुओं व सिखों के वोट ज्यादा हैं। क्षेत्र में साढ़े चौबीस फीसद जट सिख, पैंतीस प्रतिशत हिंदू अरोड़वंशी और अठारह प्रतिशत कंबोज बिरादरी के वोट हैं। इसके अलावा अरोड़वंशी समाज के साथ ही बाबरिया समाज भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा। हिंदू अरोड़वंशियों के करीब चार लाख वोट हैं। बाबरिया समाज के भी करीब एक लाख वोट हैं।
थोक में किन्नू-लीची, लेकिन फल आधारित उद्योग कोई नहीं
फिरोजपुर जिले के इतिहास की बात करें तो यह भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर पर स्थित सीमांत जिला है। यहां के विधानसभा क्षेत्र फाजिल्का में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के समाधी स्थल हैं। इस जिले में बाघा बॉर्डर भी पड़ता है, जहां से भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों का आवागमन होता है। क्षेत्र में किन्नू-लीची के बहुत बगीचे हैं। यहां पर सीजन में किन्नू और लीची थोक में होते हैं। लेकिन क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर पड़ोसी क्षेत्र बठिंडा से होने के बावजूद यहां पर कोई फल आधारित उद्योग स्थापित नहीं करा पाईं। सीमावर्ती गांव परेडवाला में एक किसान दलीप सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने नहरों में पानी पहुंचाया, लेकिन वह टेल तक पानी पहुंचाने में असफल रही।
