बेहतर प्रदर्शन पर है विजयशंकर की नजरें

नई दिल्ली । हरफनमौला खिलाड़ी विजय शंकर के हाल में आईपीएल में खराब प्रदर्शन के बाद एक बार उनके विश्व कप में नंबर चार पर खेलने को सवाल उठ रहे हैं। कई दिग्गजों का मानना है कि विजय शंकर को कुछ मैचों में प्रदर्शन के आधार पर ही विश्व कप टीम में जगह मिली जबकि अंबाति रायडू का अनुभव और प्रदर्शन कहीं ज्यादा था। शंकर को लेकर पहले भी विवाद रहे हैं। इससे पहले निदाहास ट्रॉफी में शंकर अहम समय पर नहीं बना पाये थे। शंकर ने 19 गेंदों में 17 रन बनाए थे। शंकर ने कहा कि उस वाकये ने उन्हें जीवन का अहम पाठ पढ़ाया और एक मजबूत इंसान बनाया जो समझ सका कि मौजूदा पल का आनंद कैसे उठाया जाता है और क्रिकेट के मैदान पर ज्यादा दबाव नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोगों को यह तक नहीं पता कि वह उस फाइनल मैच में पहली बार भारतीय टीम की तरफ से बल्लेबाजी करने उतरे थे। अब उनकी नजरें विवादों पर नहीं बल्कि बेहतर प्रदर्शन पर लगी हैं।
उन्होंने कहा, ‘मैं निश्चित तौर पर कहूंगा कि निदाहास ट्रॉफी एक क्रिकेटर के तौर पर मेरे लिए जीवन बदलने वाला पल था। उस बात को तकरीबन एक साल हो चुका है और हर कोई जानता है कि क्या हुआ था और वह कितना मुश्किल था।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने तकरीबन 50 फोन कॉल लिए थे। मीडिया के लोग मुझसे फोन कर रहे थे और वही सवाल पूछ रहे थे। यहां तक की सोशल मीडिया मेरे लिए मुसीबत बन गया था। मैं थोड़ा निराश हो गया था और उससे बाहर निकलने में मुझे समय लगा।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन, दूसरी तरफ इन सभी चीजों ने मुझे सिखाया कि इस तरह की स्थिति को कैसे संभालना है और किस तरह से बाहर आना है। उस वाकये ने मुझे बताया कि एक दिन खराब होने का मतलब यह नहीं है कि विश्व का अंत हो गया। यह सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ, यह बीते वर्षों में कई शीर्ष खिलाड़ियों के साथ हुआ है।’
शंकर के मुताबिक, ‘सबसे अच्छी बात यहा थी कि बल्ले के साथ वो मेरा पहला अनुभव था। मैंने उस सीरीज में गेंदबाजी तो की थी लेकिन फाइनल मैच में मैं पहली बार बल्लेबाजी करने उतरा था। वो हालांकि जीवन की सीख देने वाला पल था। उसने मुझे सिखाया कि हर पल का आनंद कैसे उठाते हैं और इस तरह के वाकये अस्थायी होते हैं। साथ ही मुझे सिखाया कि मुझे अपना 100 फीसदी देना चाहिए।’ नंबर-4 को लेकर जारी विवाद पर वापस आते हुए शंकर ने कहा कि वह सीख गए हैं कि दबाव मुक्त कैसे हुआ जाता है और अब उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या कह रहा है। उन्होंने कहा, ‘न्यूजीलैंड में जब मैंने नंबर-3 पर बल्लेबाजी की तो मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा। सबसे अच्छी बात यह रही कि टीम प्रबंधन ने मुझ पर भरोसा दिखाया और माना कि मैं यह काम कर सकता हूं। इससे आपको अतिरिक्त प्ररेणा मिलती है। टीम की जरूरत मेरी प्राथमिकता है और मैं हर स्थिति में खेलने को तैयार हूं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं अपने खेल का आनंद ले रहा हूं और अपने आप पर किसी तरह का दबाव नहीं ले रहा। मैं स्थिति को समझने और उसके हिसाब से खेलने पर ध्यान दे रहा हूं। मैं अपने काम को महत्व दे रहा हूं और इसको लेकर कोई छोटा रास्ता नहीं है।’
उन्होंने कहा कि वह देखकर सीखने वाले हैं और जब भी अपने सीनियर खिलाड़ियों के साथ रहते हैं तो ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, ‘पहली बात तो यह है कि भारतीय टीम का हिस्सा बनना वो सपना है जो हम तब से देखते हैं जबसे हम खेलना शुरू करते हैं। मैं वैसा खिलाड़ी हूं जो कोहली, माही भाई, रोहित को देखकर सीखना पसंद करता है। मैंने एक क्रिकेटर के तौर पर अपने आप में सुधार करने के लिए उनसे काफी बात की है। उन्होंने मुझसे कहा है कि मैं अपना काम कर रहा हूं और मेरा ध्यान सिर्फ चीजों को सरल रखने पर होना चाहिए।’ शंकर को लगता है कि उन्हें अपनी गेंदबाजी पर अभी और काम करना है। उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी गेंदबाजी पर काफी काम कर रहा हूं और मैं सही प्रक्रिया पर ध्यान देने में यकीन रखता हूं। मुझे लगता है कि जब स्थिति आएगी और कप्तान मुझे गेंद देंगे तो मेरे अंदर आत्मविश्वास होना चाहिए तभी मैं अच्छा कर पाऊंगा।’
