फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की तलवार अभी भी लटकी पाकिस्तान के सिर पर

पेशावर । आतंकी मसूद अजहर के बाद हाफिज सईद के साले अब्दुल रहमान मक्की के खिलाफ की गई कार्रवाई के बावजूद पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की तलवार पहले की ही तरह लटकी हुई है। इसका सबूत है हाल ही में चीन के गुआंगझू में हुई एशिया पेसेफिक ग्रुप की बैठक जिसमें पाकिस्तान से आए अधिकारियों को तीखे और दो-टूक सवालों का सामना करना पड़ा। इन सवालों के जवाब में पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों और इससे जुड़े लोगों की संपत्तियों को सीज करने और कार्रवाई करने की जानकारी दी है। अब एपीजी ने पाकिस्तान से जिन सवालों का जवाब मांगा है उनसे संबंधित लिखित जानकारी मिलने के बाद ही एफएटीएफ पाकिस्तान पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। पाकिस्तान की आर्थिक हालत भी इस फैसले पर काफी कुछ निर्भर करेगी।
बता दें कि फिलहाल एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला है। यदि आगामी बैठक में पाकिस्तान के जवाब से एफएटीएफ संतुष्ट नहीं होता है, तब पाकिस्तान को काली सूची में डाल देगा, जिससे पाकिस्तान में विदेशी निवेश रुक जाएगा। बता दें कि गुआंगझू की बैठक में पाकिस्तान के दस सदस्यीय दल का नेतृत्व वित्त सचिव मोहम्मद यूनस दाघा ने किया था। यह बैठक दो दिन तक चली जिसमें भारतीय दल भी शामिल था। भारतीय दल ने भी इस बैठक में पाकिस्तान से दो-टूक सवाल पूछे थे। पाकिस्तान ने इस बैठक में उन तमाम कदमों का जिक्र किया जिसके तहत आतंकियों पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल पाकिस्तान के दिए जवाब तय करेंगे कि एफएटीएफ क्या फैसला लेगा। एपीजी ने पाकिस्तान का दौरा कर यह जाना था कि आखिर सरकार ने वहां पर आतंकियों पर लगाम लगाने के लिए कितने कारगर उपाय किए हैं। जिस वक्त इस संस्था ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था तब इसी ग्रुप की जानकारी के बाद ही यह फैसला लिया गया था। एपीजी ने माना था कि पाकिस्तान में आतंकियों पर लगाम लगाने के मामले में विभिन्न एजेंसियों में कोई तालमेल नहीं है।
