कांग्रेस ने रात 3 बजे की री-काउंटिंग की मांग की तो रोका परिणाम, सुबह 4 बजे जीते अरविंद शर्मा

रोहतक लोकसभा सीट पर कांटे के मुकाबले में तीन बार के कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा से भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा लगभग 7503 वोट से जीत गए। रात 2 बजे तक काउंटिंग चलती रही। बैलेट पेपर व वीवीपैट से मिलान नहीं होने के आरोप लगा रात 3 बजे कांग्रेस ने री-काउंटिंग की मांग की। कांग्रेस के इलेक्शन एजेंट चंद्रसेन दहिया ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को वोट के लिए फार्म नहीं देने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मांग नहीं मानी गई तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि नया गांव के बूथ पर वीवीपैट व ईवीएम के वोटों का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद अलसुबह 4 बजे डीसी ने अरविंद शर्मा की जीत घोषित कर दी।

अपने गढ़ में भी बड़ी लीड नहीं ले पाए दीपेंद्र हुड्डा

  1.  

    ईवीएम की काउंटिंग में अरविंद शर्मा 2636 वोटों से आगे रहे। बाद में बैलेट पेपरों की गिनती में यह मार्जिन ज्यादा हो गया। आरक्षण आंदोलन के तीन वर्ष बाद भाजपा की ओर से चला गया गैर जाट का कार्ड शहर से लेकर गांवों तक में काम कर गया। पहली बार रोहतक लोकसभा सीट पर गैर जाट नेता जीत की ओर अग्रसर है। कांग्रेस में संगठन और एकजुटता की कमी की वजह से इस सीट पर यह नतीजे देखने पड़े। 

     

  2.  

    भाजपा ने रेवाड़ी जिले के यादव बाहुल्य कोसली विधानसभा से 74980 वोट की भारी जीत दर्ज की। यही लीड कांग्रेस के लिए परेशानी बनी। पिछली बार यहां से 42538 वोट की ही जीत थी। वहीं, महम में दीपेंद्र ने जीत तो दर्ज की, लेकिन भारी अंतर से लीड कम हुई। पिछली बार यहां से वे 50598 वोट से जीते थे, लेकिन इस बार यह अंतर केवल 14105 का रह गया। 

     

  3.  

    कभी कांग्रेस में साथी रहे अरविंद शर्मा ने ही दीपेंद्र को कड़ी टक्कर दे दी। भाजपा के लिए चौकान्ने वाला कृषिमंत्री ओपी धनखड़ के हलके बादली में कांग्रेस की जीत का फैक्टर रहा। कांग्रेस ने यहां से 11415 वोटों से जीत दर्ज की। इनेलो, जेजेपी और बसपा-लोसुपा प्रत्याशी कोई करिमशा नहीं दिखा पाए। इनेलो को अपने 20 वर्ष के इतिहास में सबसे कम वोट मिले। 

     

  4.  

    इनेलो प्रत्याशी धर्मवीर सिंह 7 हजार वोट ही ले सके। वहीं, जजपा प्रत्याशी भी 21 हजार वोटों पर ही सिमट गए। बसपा के किशन पांचाल को 38 हजार वोट मिले। कुल 18 प्रत्याशियों में से केवल दीपेंद्र हुड्‌डा की ही जमानत बची। बाकी सभी की जमानत जब्त हो गई। नोटा को 2939 वोट मिले। परिणाम की घोषणा से पहले ही भारी पुलिस और अर्द्धसैनिक बल सड़कों पर तैनात कर दिया गया।
    माह पहले ही पार्टी में आए शर्मा को टिकट मिलने पर थी नाराजगी 
    डॉ. अरविंद शर्मा दो महीने पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे। इस वजह से उनको टिकट मिलने को लेकर भी एक खेमा नाराजगी जता रहा था। कुछ नेताओं ने गुप्त बैठक की थी तो कुछ प्रचार से किनारे हो गए थे, लेकिन शर्मा ने सभी के मुंह बंद कर दिए। शर्मा ने सबसे पहले 1996 में सोनीपत लोकसभा सीट से निर्दलीय जीतकर सभी का ध्यान खींचा। 1998 में शिवसेना से लड़े, लेकिन हार गए। 

     

  5.  

    1999 में उन्होंने रोहतक से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भूपेंद्र हुड्‌डा के सामने लड़ाई लड़ी। उन्हें केवल 27265 वोट ही मिले। फिर 1999 में कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन किया। 2004 और 2009 में वे करनाल से सांसद रहे। 2014 में करनाल से ही हार गए। इसके बाद बसपा ज्वाइन की। दो जगह यमुनानगर और जुलाना से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद मार्च, 2019 में भाजपा ज्वाइन कर ली। हालांकि वे करनाल से टिकट चाह रहे थे, लेकिन उन्हें रोहतक से मैदान में उतारा गया। कुल 9 बार चुनाव मैदान में उतरे अरविंद शर्मा को 4 बार जीत मिली है।

     

  6. सुबह 4:30 बजे जीत का जश्न

     

    हुड्‌डा का किला ढहा, दादा से लेकर पोता तक 9 बार जीत चुके हैं रोहतक सीट : रोहतक लोकसभा सीट को हुड्‌डा को गढ़ माना जाता है। यहां से चौ. रणबीर सिंह हुड्‌डा दो बार, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा 4 बार चुनाव जीत चुके हैं। 2004 में जीतने के बाद उन्होंने सीएम बनने के लिए यह सीट छोड़ दी थी। इसके बाद लगातार 3 बार दीपेंद्र हुड्‌डा यह सीट जीते। चौथी बार भी उन्होंने बेहद कड़ी टक्कर दी। इससे पहले भूपेंद्र हुड्‌डा भी ताऊ देवीलाल के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में 3 बार जीत चुके हैं। भूपेंद्र हुड्‌डा ने एक बार देवीलाल को 2664 वोट से हराया तो दूसरी बार मात्र 383 वोट से जीते।

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