’भगवान से संबंध जोड़ना जरूरी : दिव्यांशु महाराज’

बाराबंकी । मनुष्य को भगवान से सीधे संबंध बनाना चाहिए अर्थात कोई न कोई संबंध जोड़ करके ही भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। यही उचित है। उक्त बात अयोध्या धाम से पधारे मानस मर्मज्ञ दिव्यांशु जी महाराज ने श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर हरपालपुर में आयोजित रामकथा में पांचवे दिन भक्त जनों के बीच कहीं। कथा व्यास दिव्यांशु जी महाराज ने अहिल्या उद्धार की कथा का भावनात्मक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता अहिल्या पर तो भगवान की संपूर्ण कृपा बरसी। उन्होंने नैनो से उन्हें देखा, कर कमलों से उन्हें इंगित किया, चरण कमलों से उनका उद्धार कर दिया। महाराज जी ने  बताया कि संतों के श्राप में भी कहीं ना कहीं हित होता है ।संत चाहे  श्राप दे या फिर आशीर्वाद दें भक्तों के लिए सभी कुछ अच्छा होता है।  दिव्यांशु जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, लखन लाल जी का विश्वामित्र जी के साथ जनकपुरी जाने का विस्तृत वर्णन भी किया। उन्होंने बताया कि श्री रामचरितमानस में अयोध्या, जनकपुर तथा लंका  का उल्लेख तुलसीदास जी महाराज ने किया है ।अयोध्या में मंथरा रहती थी। लंका में विभीषण जी जैसे सज्जन रहते थे। जबकि जनकपुर में सब के सब सज्जन संत ही निवास करते थे। बीते 20 मई से प्रारंभ श्री राम कथा में प्रतिदिन कथा सुनने वाले श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ रही है ।श्री नीलकंठेश्वर मंदिर में आयोजक महंत रघुवर दास जी एवं बृजेश मिश्रा सहित तमाम अन्य भक्तजन आए हुए अतिथियों का सत्कार भी कर रहे हैं ।यहां आगामी 29 को विशाल भंडारे का  आयोजन किया गया है। श्री राम कथा में प्रमुख रूप से सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया, डॉक्टर विजय कुमार शुक्ल ,नंद कुमार मिश्रा, साहब  सिंह, मथुरा मौर्य ,हरिशंकर मिश्रा, पंडित उमाशंकर जी, राजेश कुमार, प्रदीप कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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