मानवता ने मिटाए मजहबी भेद, हिंदू-मुस्लिम परिवार ने एक-दूसरे को किडनी दान कर बचाई दो जान

मानवता ने एक बार फिर मजहबी भेद मिटा दिए। इसका एक उदाहरण मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में तब देखने को मिला जब एक मुस्लिम और एक हिंदू परिवार के सदस्यों ने रजामंदी से एक-दूसरे के प्रियजन के लिए किडनी डोनेट कर उनकी जान बचाई। बिहार की मंजुला को जम्मू-कश्मीर के अब्दुल अजीज की पत्नी शाजिया ने और अब्दुल अजीज को मंजुला के पति सुजीत कुमार ने अपनी एक-एक किडनी दान दी है।

इससे पहले Blood group मैच न होने के कारण दोनों मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था। फिर, दोनों मरीजों के परिवारों ने डॉक्टरों की सलाह पर यह कदम उठाकर मिसाल कायम कर दी। इस तरह, दोनों मरीजों का Unique kidney swap transplant हो सका। पहले दोनों मरीजों का Kidney transplant 3 दिसंबर, 2018 को मोहाली स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में हुआ था। ताजा जांच में दोनों ही मरीजों के अलावा उन्हें किडनी डोनेट करने वाले भी पूरी तरह स्वस्थ हैं।

Blood groupमैच न होने के कारण Kidney transplant में आई थी अड़चन

 

 

पटना (बिहार) निवासी सुजीत कुमार बैंक में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी मंजुला की तबीयत जनवरी 2018 में अचानक बिगड़ी। इलाज के दौरान पता चला कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं। 11 महीने तक सप्ताह में दो बार डायलिसिस होता रहा। मंजुला की बीमारी के कारण पूरा परिवार परेशान था।

 

डॉक्टरों ने Kidney transplant की सलाह दी। तब सुजीत अपनी किडनी डोनेट करने को तैयार हो गए लेकिन Blood groupमैच न होने के कारण ऐसा न हो सका। सुजीत ने बताया कि इंटरनेट पर लगातार सर्च करने के दौरान आई किडनी एप के बारे में पता चला। उसके बाद चंद दिनों में सबकुछ फिक्स हो गया और 3 दिसंबर 2018 को उन्होंने अपनी एक किडनी जम्मू-कश्मीर के अब्दुल अजीज को डोनेट कर दी। वहीं अपनी पत्नी के लिए अब्दुल अजीज की पत्नी शाजिया की ओर से डोनेट की गई किडनी को ट्रांसप्लांट कराने में सफलता पाई।

पल-पल पहाड़ हो गई थी जिंदगी

 

 

जम्मू-कश्मीर के बारामूला निवासी अब्दुल अजीज तीन साल से किडनी की बीमारी से परेशान थे। पेशे से कारपेंटर अब्दुल पर तीन बेटियों और एक बेटे के  साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। मगर बीमारी के कारण जिंदगी का हर पल पहाड़ जैसा लगने लगा था। तब पत्नी शाजिया ने अपनी किडनी देने का निर्णय लिया लेकिन यहां भी Blood group मैच न होने से निराशा हाथ लगी। शाजिया को भी डॉक्टरों से आई किडनी एप की जानकारी मिली। इसके माध्यम से बिहार और कश्मीर के दोनों परिवारों को मिलाया गया। इस तरह दोनों ही परिवार एक-दूसरे को किडनी डोनेट करने को तैयार हो गए।

 

हिन्दू-मुस्लिम की परवाह करते तो लौट कर नहीं आती खुशियां

 

 

फोर्टिस अस्पताल के सर्जन डॉ. प्रियदर्शी रंजन का कहना है कि यह केस एक मिसाल है। अल-अलग धर्मों के दोनों परिवारों ने मानवता का फर्ज निभाया है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अगर हिंदू-मुस्लिम की परवाह करते तो शायद आज उनके परिवार की रूठी खुशियां वापस न लौटतीं।

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