पहली बार गठित जल शक्ति मंत्रालय संभालेंगे शेखावत, पाकिस्तान बहकर जा रहे पानी का उपयोग चुनौती

जोधपुर। देश में पहली बार जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया गया है। देश के अधिकांश हिस्सों में पेयजल संकट गहराया हुआ है। ऐसे में इस मंत्रालय की अहमियत बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाए गए जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत को इस महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंप उन पर भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री के भरोसे पर खरा उतरने के लिए शेखावत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
सबसे अहम चुनौती पाकिस्तान बहकर जा रहे भारत के हिस्से के पानी को रोकने की परियोजना पर काम करना। ताकि, इस पानी का देश में ही उपयोग किया जा सके। वहीं उन्हें अलग-अलग राज्यों के बीच पानी को लेकर चल रहे टकरावों से भी पार पाना होगा। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे महत्वकांक्षी नदियों को जोडऩे की परियोजना पर तेजी लाने पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा।
देश में ज्यादातर राज्यों में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। ऐसे में इस समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में शेखावत को काम करना होगा। पार्टी संगठन की तरफ से सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में काम करने के दौरान शेखावत इस समस्या को बेहद नजदीक से देख चुके हैं। रेगिस्तान में पानी सहेजने के पारम्परिक तरीकों को आगे बढ़ाने से भी पेयजल संकट से कुछ हद तक निपटा जा सकता है। अलग-अलग राज्यों के बीच पानी को लेकर बरसों पुराने विवाद जारी है। सतलुज-यमुना लिंक नहर का मुद्दा कई दशकों से उलझा हुआ है। 1981 में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे का समझौता हुआ था। लेकिन बाद में पंजाब इस समझौते से मुकर गया। इसी तरह कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच ब्रिटिश राज के जमाने से ही कावेरी जल विवाद चला आ रहा है।
