पहली बार साथ नजर आए बाघ एमटी-3 और बाघिन एमटी-4, यानी बन गया दूसरा जोड़ा

कोटा । मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के लिए खुशखबरी है कि यहां टाइगर एमटी-3 और टाइग्रेस एमटी-4 साथ-साथ नजर आए हैं। यानी यहां एमटी-1 और एमटी-2 के बाद यहां बाघों का दूसरा जोड़ा बन गया है। रिजर्व की ओर से की जा रही रेगुलर मॉनिटिरिंग के तहत सोमवार को बाघिन यहां बाघ वाले एरिया में साथ-साथ नजर आई। रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुकंदरा में अब चारों बाघ-बाघिन का जोड़ा बन गया है। दोनों बाघ अपने-अपने एरिया में बाघिन के साथ मूवमेंट कर रहे हैं। विभाग की ओर से अलग-अलग एरिया में रिजर्व के कर्मचारी लगे हुए हैं। साथ ही पेयजल से लेकर अन्य बंदोबस्त पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बाघ-बाघिन वाले एरिया में निगरानी के लिए 25 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। रिजर्व के किसी भी एरिया में एंट्री होने एंटी पोचिंग सर्विलांस सिस्टम के कंट्रोल रूम और कैमरा ट्रैप में जांच की जा रही हैं।  पिछले दिनों जयपुर में हुई मीटिंग के बाद विभाग की ओर से गांवों के स्वैच्छिक रिलोकेशन को लेकर मीटिंग की तैयारियां शुरू हो चुकी है। कोटा और झालावाड़ के जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए 10 दिनोंमें विलेज रिलोकेशन मीटिंग की उम्मीद है। ताकि स्वैच्छिक रिलोकेशन होने वाले गांवों को लेकर चर्चा औरर समाधान हो सके।  मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के लिए खुशखबरी है कि यहां टाइगर एमटी-3 और टाइग्रेस एमटी-4 साथ-साथ नजर आए हैं। यानी यहां एमटी-1 और एमटी-2 के बाद यहां बाघों का दूसरा जोड़ा बन गया है। रिजर्व की ओर से की जा रही रेगुलर मॉनिटिरिंग के तहत सोमवार को बाघिन यहां बाघ वाले एरिया में साथ-साथ नजर आई। रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुकंदरा में अब चारों बाघ-बाघिन का जोड़ा बन गया है। दोनों बाघ अपने-अपने एरिया में बाघिन के साथ मूवमेंट कर रहे हैं। विभाग की ओर से अलग-अलग एरिया में रिजर्व के कर्मचारी लगे हुए हैं। साथ ही पेयजल से लेकर अन्य बंदोबस्त पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बाघ-बाघिन वाले एरिया में निगरानी के लिए 25 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। रिजर्व के किसी भी एरिया में एंट्री होने एंटी पोचिंग सर्विलांस सिस्टम के कंट्रोल रूम और कैमरा ट्रैप में जांच की जा रही हैं। पिछले दिनों जयपुर में हुई मीटिंग के बाद विभाग की ओर से गांवों के स्वैच्छिक रिलोकेशन को लेकर मीटिंग की तैयारियां शुरू हो चुकी है। कोटा और झालावाड़ के जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए 10 दिनों में विलेज रिलोकेशन मीटिंग की उम्मीद है। ताकि स्वैच्छिक रिलोकेशन होने वाले गांवों को लेकर चर्चा औरर समाधान हो सके। 

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