पंजाब में एमबीबीएस एडमिशन के लिए बदले नियम, बाहरी छात्रों को होगा फायदा, आवेदन भी शुरू

पंजाब के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिले के लिए फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार केंद्र सरकार द्वारा सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को आरक्षण देने के कारण प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटें बढ़ाई गई हैं। इससे अब प्रदेश के आठ कॉलेजों में एमबीबीएस की 1125 सीटें हो गई हैं। 13 डेंटल कॉलेज में 1040 सीटों पर दाखिला होगा। हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से सीट की अधिकारिक घोषणा काउंसिलिंग के वक्त की जाएगी। सूबे के मेडिकल शिक्षा व रिसर्च विभाग की ओर से इस बार दाखिले में 10वीं पंजाब से करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

सरकारी और निजी मेडिकल काउंसिलिंग में दाखिले के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग फरीदकोट यूनिवर्सिटी द्वारा कराई जाएगी। इसके लिए विद्यार्थियों को 26 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के बाद 26 से 28 जून तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा। एक जुलाई को दाखिले के लिए मेरिट सूची यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की जाएगी। 

इसके बाद दो से पांच जुलाई तक पहली काउंसिलिंग होगी। आठ जुलाई को पहली काउंसिलिंग की मेरिट सूची के तहत कॉलेज अलॉट किए जाएंगे। सीटें खाली रहने की सूरत में दूसरी काउंसिलिंग की जाएगी। जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है। काउंसिलिंग के लिए 5000 रुपये शुल्क चुकाना होगा।    

इस बार नियम में हुआ है बदलाव
पंजाब सरकार के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से देश के सभी प्रदेशों के विद्यार्थियों के लिए पंजाब में प्रवेश के रास्ते खोल दिए हैं। 06 जून को जारी नोटिफिकेशन में 10वीं पंजाब से करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

नोटिफिकेशन के पेज नंबर 13 के पहले प्वाइंट में स्पष्ट किया है कि कोई भी अभ्यर्थी पंजाब में कभी भी पांच साल रहा हो अथवा उसने मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट देने से पहले लगातार दो साल पंजाब के स्कूल में 11वीं व 12वीं की पढ़ाई की हो, तो वह पंजाब के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने की योग्यता रखते हैं। 

बता दें कि 85 प्रतिशत सीटें राज्य सरकार के नियमों के आधार पर भरी जाती हैं। शेष 15 प्रतिशत सीटें सेंट्रल पूल के तहत ओपन रहती हैं, जिसमें बाहरी राज्य का कोई भी बच्चा योग्यता के आधार पर प्रवेश पा सकता है।

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