ट्रेन में होंगे मेडिकल किट, टीटीई से ले सकेंगे किट और डॉक्टर की जानकारी

जोधपुर। ट्रेनों में सफर के दौरान यात्री की तबीयत बिगडऩे पर फिलहाल ट्रेन के अंदर ही उपचार देने की कोई व्यवस्था नहीं है। यात्री की शिकायत मिलने पर रेलवे नजदीक के किसी स्टेशन पर डॉक्टर की व्यवस्था करता है। रेलवे ने करीब 16 साल पहले ट्रेन में यात्रा करने वाले डॉक्टर्स को यात्री की मदद के लिए प्रत्येक श्रेणी के टिकट पर 10 फीसदी छूट का ऑफर दिया था। इसमें शर्त यह थी कि डॉक्टर को मेडिकल किट लेकर सफर करना होगा। हालांकि डॉक्टर्स को रेलवे का यह ऑफर रास नहीं आया। दो साल में जोधपुर से महज 8 डॉक्टर्स ने ही इस प्रावधान के तहत छूट ली। ट्रेन में इलाज को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाने के बाद अब रेलवे ने एम्स की मदद से मेडिकल किट तैयार किया है। इसमें लाइफ सेविंग डिवाइस के साथ प्रसव किट व ऑक्सीजन सिलेंडर तक होंगे। कुछ समय बाद इन किट को लंबी दूरी की ट्रेनों में रखना शुरू किया जाएगा, ताकि यात्री की तबीयत बिगडऩे पर उसे चिकित्सकीय मदद दी जा सके। दरअसल, ट्रेन यात्री की तबीयत बिगडऩे पर समुचित चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने पर मौत के कई मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए रेलवे से ट्रेनों में डॉक्टर के साथ मेडिकल किट आवश्यक रूप से रखने को कहा था। एम्स जैसे संस्थान से किट तैयार करवाने की सलाह भी दी थी। राजस्थान के एक यात्री की 1996 में ऑक्सीजन नहीं मिलने से हुई मौत का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। विजयवाड़ा में ट्रेन से गिरे यात्री को 4 घंटे मदद नहीं मिलने और मौत होने पर भी 1 साल पहले सुप्रीम कोर्ट रेलवे पर नाराज हुआ था।
एक साल की मशक्कत के बाद अब रेलवे बोर्ड ने मेडिकल किट तैयार किया है। इसमें लाइफ सेविंग डिवाइस, दवाएं, इंजेक्शन, प्रसव किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, लैरिंगोस्कोप्स, कैथिटर, सीरिंज व ऑक्सीजन डीफिब्रिलैटर जैसी वस्तुएं मौजूद रहेंगी। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक टीटीई को इसके लिए जवाबदेह बनाया जाएगा। वह यात्री को जरूरत पडऩे पर ट्रेन में मौजूद डॉक्टर की मदद दिलाएगा और इस किट के बारे में पूरी जानकारी रखेगा।
