विधानसभा सत्र के बाद होगी राजनैतिक नियुक्तियां

जयपुर । राजस्थान में निकायों, पंचायतों, परिषदो के चुनाव प्रस्तावित है ऐसे में सरकार पंचायतों के चुनाव से पहले परिसीमन करना चाहती है तो दूसरी ओर राज्य विधानसभा का सत्र 27 जून से शुरू हो रहा है ऐसे में उन राजनेताओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आशाओ पर पानी फिर गया है जो सरकार की ओर से की जाने वाली निगम बोर्डो में नियुक्तियां चाह रहे थे हालांकि उनके लिए दिल्ली से बडी खुशी की खबर यह आई है कि कांग्रेस आलाकमान ने राजनैतिक नियुक्तियों करने का पूर्ण अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया है।
राजस्थान में निगम, बोर्ड और अकादमियों की संख्या की बात की जाए और इन्हीं के साथ अन्य राजनीतिक नियुक्तियां की बात की जाए तो प्रमुख रूप से 100 से ज्यादा चैयरमेन और अध्यक्ष बनाए जा सकते है लेकिन पिछली सरकारों के समय हुई नियुक्तियों की सूची देखने के बाद स्पष्ट होता है कि कोई भी सरकार 30-35 अध्यक्ष और चेयरमैन राजनीतिक रूप से नियुक्ति करती है इसके अलावा या तो पद खाली रखें जाते है या प्रशासक के रूप में अधिकारी को बिठाया जाता है ऐसे में इस बार भी क्या सरकार इनसे ज्यादा नियुक्तियां करेगी यह देखने वाली बात होगी। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की समाप्ति के तुरंत बाद प्रयास किया गया था कि कुछ बडे निगम, बोर्ड और एकेडमियों में राजनीतिक नियुक्तियां कर दी जाए लेकिन कांग्रेस आलाकमान की अनिश्चिततता की स्थ्ििा के कारण वह नियुतियां अटक गई अधिकारिता विभाग की ओर से भी जो चयन समिति बनाई गई है उसके पीछे कारण यह है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से इस बारे में सरकार से हलफनामा मांगा गया था कि बाल कल्याण समितियां का गठन जल्द ही किया जाए ऐसे में सरकार को यह चयन समिति तुरंत बनानी पडी लेकनि इसका मतलब यह नहीं है कि राजस्थान में अन्य निगम बोर्ड और अकेडमी में भी जल्द नियुक्तियां हो जाएगी पिदले अनुभव की बात की जाए तो कांग्रेस सरकार के समय कई निगम बोर्डाे में तो आचार संहिता के दो तीन महीने पहले ही नियुक्ति हुई थी वहीं कई अध्यक्ष कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे वहीं कांग्रेस में जीते तो मंत्री और हारे तो संगठन में महामंत्री की पंरपरा के चलते कई बार कार्यकर्ताओं के बीच में विरोध के स्वर उठते रहे है और यही विरोध के स्वर यदि आगे बढे तो सरकार के लिए विरोध झेलना मुश्किल होगा यही कारण है कि दिल्ली चाहती है कि इस बार संगठन से जुडे लोगों को ज्यादा मौके दिए जाए ना कि नेता विशेष से जुडे लोगों को औद यदि फिर से नेता विशेष जुडे नेताओं को ही राजनीतिक नियुक्तियों में मौका दिया गया तो हो सकता है कि सार्वजनिक रूप से विरोध उभर कर सामने आ जाएं विरोध के स्वर सार्वजनिक रूप से उभर कर आता है तो सरकार और मंत्रियों की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह उस विरोध का सामना कर पाए। वैसे निगम, बोर्डो और एकेडमियों में नियुक्तियां पाने के लिए कई चेहरों ने अपने आकाओं के जरिए खुद का नाम आगे बढाना शुरू कर दिया है और वह नेता अपने आकाओं के जरिए मुख्यमंत्री तक भी अपनी अप्रोच बनाने के प्रयास में जुट गए है अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अकेले राजनीतिक नियुक्तियां करते है या फिर उपमुख्यमंत्री तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ प्रभारी महासचिव या अन्य नेताओं की राय को भी तवज्जो मिलती है यदि एक ही नेता की ओर से राजनीतिक नियुक्तियां हुई तो राजस्थान में जिस तरह की गुटबाजी की खबरे चल रही है वह खबरें खुलकर सामने आ सकती है इसी से बचने के लिए विधानसभा सत्र के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चिंतन मंथन शुरू होगा तब तक कुछ छोटी मोटी नियुक्तियां जरूर दी जा सकती है।
