कांग्रेस विधायक रोशन बेग ने दिया इस्तीफा, 12 MLA पार्टी की बैठक में नहीं पहुंचे

बेंगलुरू: कर्नाटक कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री रोशन बेग ने मंगलवार को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंपा. इससे पहले मंगलवार सुबह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में रोशन बेग समेत 12 विधायक नहीं पहुंचे. कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया के नेतृत्व में इस बैठक का आयोजन हुआ. जो नहीं पहुंचे उनके नाम इस प्रकार है:
1. रामालिंगा रेड्डी
2. डॉ सुधाकर
3. रोशन बेग
4. तुकाराम
5. अंजलि निंबालकर
6. एमटीबी नागराज
7.संगमेश्वर
8. शिवन्ना
9. फातिमा
10. बी नागेंद्र
11. राजे गौड़ा
12. रामाप्पा
विधायक तुकाराम, एमटीबी नागराज और डॉ सुधाकर ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया. पार्टी ने इससे पहले सोमवार को सभी विधायकों से इस बैठक में शामिल होने को कहा था. इसके साथ ही पार्टी ने संकेत दिया था कि यदि बागी विधायक इस बैठक में शामिल नहीं होंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
इधर कर्नाटक की सियासत में जारी उठापटक का मसला मंगलवार को लोकसभा में भी उठा. लोकसभा में अधीर रंजन ने कहा कि ये शिकार की पॉलिटिक्स बंद होनी चाहिए. लोकसभा में अधीर रंजन ने कहा कि ये शिकार की पॉलिटिक्स बंद होनी चाहिए. लोकतंत्र को बचा कर रखिए. ये लोग कह रहे हैं कि कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश की बारी है. विधायकों को जबरन यहां से वहां लाया जा रहा है. इस पर राजनाथ सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि आप लोग अपने घर को संभाल नहीं पा रहे हैं और हम पर आरोप लगा रहे हैं. ऐसा कर सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं.
स्पीकर ने कहा कि सही तरीके से नहीं दिए गए इस्तीफे
कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में 13 विधायकों के इस्तीफे और दो निर्दलीयों के समर्थन वापस लेने से उपजे सियासी संकट के बीच विधानसभा स्पीकर ने मंगलवार को कहा कि बागी विधायकों ने सही तरीके से इस्तीफे नहीं सौंपे. इस पर फैसला लेने का कोई तय वक्त नहीं है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कहा कि यह एक प्रक्रियागत मसला है. इस संबंध में कुछ निश्चित नियम हैं, उसी के आधार पर हमको निर्णय लेना होगा. स्पीकर के ऑफिस को उसी के साथ जिम्मेदारी के साथ नियमों का अनुपालन करना होगा. इस संबंध में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है. इन नियमों में एक उपबंध कहता है कि यदि स्पीकर आश्वस्त होता है कि ये इस्तीफे बिना किसी दबाव के स्वैच्छिक आधार पर दिए गए हैं और उनको स्वीकार किया जा सकता है, ऐसा नहीं होने पर मुझे नहीं पता कि क्या करना होगा?…उस स्थिति में मेरी ज्यादा जानकारी नहीं है.
