दिल्ली को मिलेंगी 7,500 इलेक्ट्रिक बसें, प्रदूषण पर रेखा सरकार का बड़ा दांव

दिल्ली। दिल्ली सरकार ने पिछले 11 महीनों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या-क्या काम किए हैं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी। रेखा गुप्ता ने दिल्ली में प्रदूषण पर चर्चा के दौरान बताया कि सरकार ने काफी ठोस कदम उठाए हैं। डस्ट-फ्री सड़कों के लिए वाटर स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन्स और नई मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली नगर निगम को 2300 करोड़ रुपये की मदद दी गई है जिससे धूल और कूड़ा नियंत्रण पर फोकस हो रहा है।रेखा गुप्ता ने बताया कि मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शुरू हो चुका है तो वहीं प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार पीयूसी सर्टिफिकेट को लेकर सख्त है इसके लिए 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' की व्यवस्था लागू है। इसी दिशा में बुराड़ी फिटनेस सेंटर का अपग्रेडेशन और नंदनगरी और टेकखंड में ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशनों का शिलान्यास किया गया है।सीएम ने बताया कि इलेक्ट्रिक DEVi बसों की शुरुआत के साथ-साथ ई-ऑटो और ई-टैक्सी को बढ़ावा दिया जा रहा है। हम साल भर प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम कर रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण को व्यापक, सतत और व्यवस्था-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ा रहे हैं खुद पर बनते मीम पर CM रेखा गुप्ता हुईं भावुकये भी पढ़ें:जेल में ही रहेंगे उमर-इमाम: रेखा गुप्ता बोलीं- कड़ी से कड़ी सजा मिलेये भी पढ़ें:6.72 लाख आयुष्मान कार्ड, 283 आरोग्य मंदिर; LG ने बताया दिल्ली में क्या-क्या हुआ।रेखा गुप्ता ने सदन में कहा कि ‘प्रदूषण कोई दो-तीन महीनों की समस्या नहीं है कि केवल सर्दियों तक सीमित मान ली जाए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमें 12 महीने निरंतर काम करना होगा। 12 के 12 महीने सड़कों पर एजेंसियों को लगातार सक्रिय रखना होगा तभी प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण वास्तव में बेहतर हो पाएगा। पर्यावरण हर नागरिक और परिवार की साझा जिम्मेदारी है।’

पर्यावरण मंत्री क्या बोले?

वहीं पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 2014 से 2025 तक दिल्ली को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने लगातार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी माना लेकिन जब से रेखा गुप्ता सरकार आई है तब से ‘एक्शन मोड’ अपनाया गया है। तीनों लैंडफिल साइट्स – ओखला, भलस्वा और गाजीपुर- पर बायोमाइनिंग के जरिए हर महीने हजारों टन कूड़ा हटाया जा रहा। सिरसा ने बताया कि कंस्ट्रक्शन साइट और इंडस्ट्रियल एरिया में कड़ी निगरानी, भारी जुर्माने और सीलिंग के जरिए सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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