क्या सिर्फ सुंदरता के लिए शिव ने धारण किया चंद्रमा? इसके पीछे छिपा है सृष्टि बचाने का गहरा रहस्य

भगवान शिव भारतीय संस्कृति के सबसे रहस्यमय देवता माने जाते हैं. उनका हर रूप, हर चिन्ह और हर आभूषण अपने भीतर गहरा अर्थ छिपाए हुए है. उनके गले में लिपटा नाग हो, शरीर पर लगी भस्म हो या फिर माथे पर चमकता हुआ चंद्रमा-हर चीज एक कहानी कहती है. आम तौर पर लोग भगवान शिव के चंद्रमा को सिर्फ एक सुंदर आभूषण समझ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपा अर्थ बहुत गहरा है. सवाल यह है कि भगवान शिव, जो खुद संहार और सृजन दोनों के स्वामी हैं, आखिर चंद्रमा को अपने जटाओं में क्यों धारण करते हैं? क्या यह सिर्फ उनकी सुंदरता बढ़ाने के लिए है या फिर इसके पीछे कोई पौराणिक रहस्य छिपा है? हिंदू कथाओं में भगवान शिव और चंद्रमा का संबंध कई घटनाओं से जुड़ा हुआ बताया गया है. इन कथाओं के जरिए हमें जीवन, संतुलन और समय के बारे में भी महत्वपूर्ण सीख मिलती है. इस लेख में हम आसान भाषा में उसी रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश करेंगे.
भगवान शिव और चंद्रमा का संबंध
भगवान शिव को शंकर, महादेव और भोलेनाथ जैसे नामों से जाना जाता है. वे सरल भी हैं और रौद्र भी. यही कारण है कि उनके हर रूप में संतुलन देखने को मिलता है. चंद्रमा को ठंडक, शांति और मन का प्रतीक माना जाता है. वहीं भगवान शिव का तांडव उग्रता और ऊर्जा का संकेत देता है. चंद्रमा को जटाओं में धारण करना इसी संतुलन को दर्शाता है.
पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और कालकूट विष
कथाओं के अनुसार, एक समय देवताओं और असुरों ने अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन किया. इस मंथन के दौरान कई अद्भुत चीजें निकलीं, लेकिन सबसे पहले कालकूट नाम का विष बाहर आया. यह विष इतना भयानक था कि इसकी गंध से ही सृष्टि संकट में आ गई. देवता और असुर दोनों ही डर गए और किसी ने भी उसे ग्रहण करने का साहस नहीं किया.
तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. विष के असर से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिस कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया. हालांकि विष शरीर में जाने के बाद शिव के भीतर तेज गर्मी फैलने लगी.
चंद्रमा क्यों धारण किया गया
कथाओं में बताया गया है कि भगवान शिव के शरीर में बढ़ती गर्मी को शांत करने के लिए चंद्रदेव आगे आए. चंद्रमा की ठंडी किरणों से शिव के शरीर को शांति मिली. इसी वजह से भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने जटाओं में स्थान दिया. यह केवल मदद का संकेत नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि शिव हर समस्या का हल संतुलन से निकालते हैं.
शिव के मस्तक पर चंद्रमा का अर्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा मन का प्रतीक है. भगवान शिव का चंद्रमा धारण करना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने मन पर पूरा नियंत्रण पा लिया है. इसके साथ ही चंद्रमा समय का भी संकेत देता है, जो बढ़ता और घटता रहता है. शिव के सिर पर चंद्रमा यह बताता है कि वे समय से परे हैं और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हैं.
