नवंबर में ही रच ली थी साजिश, आरोपी भरत ने डर के चलते ली रचना यादव की जान
नई दिल्ली|दिल्ली में 10 जनवरी को आम आदमी पार्टी वर्कर रचना यादव मर्डर केस को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। आप विधायक आतिशी ने तो इसके लिए बीजेपी को सीधा कसूरवार बताते हुए खूब सुनाया। पुलिस ने इस केस में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में तीनों ने बताया कि सबने रचना यादव के मर्डर की प्लानिंग 2025 नवंबर में ही बना ली थी। रचना यादव आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता और शालीमार बाग में आरडब्ल्यूए (RWA) सदस्य थीं। जांच में सामने आया है कि इस हत्या की साजिश पिछले साल नवंबर में बिहार में मुख्य संदिग्ध भरत यादव ने रची थी।पुलिस के अनुसार, भरत ने हत्या को अंजाम देने के लिए 22 वर्षीय निखिल चावला को 5 लाख रुपये की सुपारी दी थी। चावला को 50,000 रुपये एडवांस दिए गए थे। उसने 9 जनवरी को रचना यादव की पूरी रेकी की और अगले दिन 10 जनवरी को उनके घर के पास ही उन्हें बेहद करीब से सिर में गोली मार दी। भरत और चावला को सोमवार को बिहार के कटिहार जिले के एक जंगली इलाके से गिरफ्तार किया गया, जहां वो हत्या के बाद छिपा हुआ था। उससे पूछताछ के बाद हरियाणा के पानीपत जिले से चावला के साथी सुमित कुमार (23 वर्ष) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।पुलिस ने बताया कि भरत ने हत्या की साजिश नवंबर में रची थी, लेकिन अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार और चोरी की मोटरसाइकिल का इंतजाम दिसंबर में दिल्ली और हरियाणा में संपर्क में रहे साथियों के जरिए किया गया था। निखिल चावला का दोस्त सुमित कुमार हत्या की इस सुपारी वाली बात से अनजान था। चावला ने उसे झूठ बोला था कि वे किसी व्यक्ति से पैसे लेने शालीमार बाग जा रहे हैं और बाइक चलाने के बदले उसे 5,000 रुपये देने का वादा किया था।
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क्यों की गई हत्या?
हत्या की वजह बताते हुए स्पेशल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) रवींद्र यादव ने बताया कि साल 2023 में भलस्वा गांव में जमीन के विवाद को लेकर रचना के पति बिजेंद्र यादव की हत्या हुई थी, जिसमें भरत आरोपी था। रचना यादव अपने पति की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थीं। भरत को डर था कि उनकी गवाही से उसे सजा हो जाएगी। भरत इस मामले में फरार चल रहा था और पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर उस पर 20,000 रुपये का इनाम रखा था। उसका भाई संजू यादव और दो अन्य आरोपी पहले से ही जेल में हैं।
AI की मदद से सुलझी गुत्थी
स्पेशल सीपी ने बताया कि रचना यादव अपने पति की हत्या के मामले में बहुत सक्रिय थीं और ट्रायल (अदालती कार्यवाही) पर बारीकी से नजर रख रही थीं। भरत को डर था कि रचना की गवाही उसे जेल भिजवा देगी। इसलिए उसने केस को कमजोर करने के लिए उनकी हत्या की साजिश रची। 10 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे, रचना जब एक पड़ोसी के अंतिम संस्कार से लौट रही थीं, तब उन्हें गोली मार दी गई। हमलावर अपने साथी के साथ मोटरसाइकिल पर फरार हो गया। हालांकि सीसीटीवी कैमरों में हमलावर का चेहरा कैद हो गया था, लेकिन शुरुआत में पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था।
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ताओं ने संदिग्ध का चेहरा साफ करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। इन तस्वीरों को नेटग्रिड (NATGRID) के जरिए मिलाया गया, जिससे पानीपत के एक व्यक्ति (निखिल चावला) से 87% से ज्यादा मैच मिला। चावला के मोबाइल फोन के जीपीएस डेटा से पुष्टि हुई कि वह हत्या के समय घटनास्थल पर और बाद में कटिहार में मौजूद था, जहां भरत भी छिपा हुआ था।चूंकि निखिल चावला का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, इसलिए भरत ने उसे पानीपत के अपने एक पुराने दोस्त नवीन के जरिए काम पर रखा था, ताकि किसी को शक न हो। हत्या को अंजाम देने के दौरान भरत खुद बिहार में ही रुका रहा। एडिशनल पुलिस कमिश्नर सिंह ने बताया, "भरत ने पकड़े जाने से बचने के लिए बहुत सावधानी से योजना बनाई थी। इस मामले में चार और लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि उनकी भूमिका का पता लगाया जा सके।" मंगलवार को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने रचना यादव के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया और आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के तहत राजधानी की कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
