धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पूजा और नमाज दोनों को मंजूरी

धार।  मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला में पूजा या नमाज के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. SC ने कहा कि बेहतर होगा कि ऐसे इतंजाम हो कि दोनों समुदाय के लोग पूजा या नमाज कर सकें. सर्वेोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) पेश हुए. वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और याचिकाकर्ता की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील पेश की। 

भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

बसंत पंचमी के दिन धार जिला स्थित भोजशाला में पूजा या नमाज को लेकर उठा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इस विवाद पर सुनवाई करते हुए SC ने अहम फैसला सुनाया है। 

भोजशाला में पूजा और नमाज के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सुनवाई की। 

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे कि बसंत पंचमी की पूजा और नमाज दोनों हो सके। 

नमाज के लिए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है. वहीं, नमाज के लिए मंदिर परिसर में ही अलग जगह निर्धारित होगी. साथ ही नमाजियों के लिए विशेष पास की व्यवस्था भी होगी. आने-जाने का रास्ता अलग होगा। 

बसंत पंचमी की पूजा के लिए भी जगह निर्धारित होगी. वहीं, बसंत पंचमी की पूजा के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में प्रशासन को बैरिकेडिंग करने के भी निर्देश दिए हैं। 

सुनाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश ASG ने कहा कि इस मामले में मुख्य याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है. ये आवेदन एक लंबित मामले में दायर किया गया है। 

वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी है। 

इस दौरान ASI की ओर से वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है. वे पूजा के लिए हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं। 

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दलील पेश करते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस याचिका में 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज से रोकने और सिर्फ हिंदूओं को ही मां सरस्वती की पूजा-अर्चना देने की इजाजत की मांग की गई थी। 

धार भोजशाला विवाद क्या है?

मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित भोजशाला एक ऐतिहासिक स्थल है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है. ASI ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है. इतिहासकारों का मानना है कि भोजशाला का निर्माण राजा भोज द्वारा किया गया था. ये स्थान शिक्षा और ज्ञान का केंद्र था, जहां देवी सरस्वती की उपासना होती थी. वहीं, मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है. साथ ही यहां लंबे समय से यहां नमाज अदा करते आ रहा है. इतिहासकारों का कहना है कि मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती की दरगाह और मजार तो अहमदाबाद में है.      भोजशाला में कब्जा करने के उद्देश्य से यह दरगाह बनाई गई है। 

Leave a Reply