नियम बदले: हाईवे पर निर्माण-कार्य चल रहा है तो टोल टैक्स में देनी होगी 70 प्रतिशत की छूट

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। सरकार ने टोल टैक्स के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए यात्रियों को निर्माण और अपग्रेडेशन कार्य के दौरान भारी छूट देने का निर्णय लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में किए गए इस बदलाव के तहत अब यात्रियों को टोल टैक्स में 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकेगी।
नए नियमों के अनुसार, जिन स्थानों पर दो-लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा करने का काम चल रहा है, वहां अब वाहन चालकों से पूरा टोल वसूलना बंद कर दिया जाएगा। अब यात्रियों को निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख से लेकर परियोजना के पूरा होने तक निर्धारित टोल दरों का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही चुकाना होगा। मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, यह संशोधन नए साल से प्रभावी कर दिया गया है। यह नियम उन सभी वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं पर लागू होगा जहां दो-लेन की सड़कों को अपग्रेड किया जा रहा है।
सिर्फ दो-लेन ही नहीं, बल्कि चार-लेन वाले राजमार्गों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। यदि किसी चार-लेन वाले हाईवे को छह या आठ-लेन में बदलने का काम चल रहा है, तो वहां यात्रियों को टोल टैक्स में 25 प्रतिशत की छूट मिलेगी। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों को कुल टोल राशि का केवल 75 प्रतिशत भुगतान करना होगा। सरकार का यह कदम उन यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो निर्माण कार्यों के कारण होने वाली देरी और असुविधा के बावजूद अब तक पूरा टोल टैक्स चुका रहे थे।
वर्तमान में देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर के दो-लेन राजमार्गों को चार-लेन में बदलने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिस पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन सड़कों के चार-लेन कॉरिडोर में तब्दील होने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30-35 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हो जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई के हिस्से को वर्तमान 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक ले जाना है। टोल नियमों में इस बदलाव से न केवल आम यात्रियों की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की संभावना है।

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