प्राकृतिक चिकित्सा क्षेत्र में सेवा के साथ पायें रोजगार

अगर आप भी प्राकृतिक तरीके से इलाज करने में विश्वास रखते हैं तो नेचुरोपैथी (प्राकृतिक चिकित्सा)  में अपना भविष्य बना सकते हैं। यह एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा है, जिसमें प्रकृति के पांच तत्वों की सहायता से व्यक्ति का इलाज किया जाता है। यह इलाज की एक बेहद पुरानी पद्धति है।
इस क्षेत्र में व्यक्ति को सामान्य चिकित्सा व मानव शरीर रचना विज्ञान के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त एक सफल नेचुरोपैथ बनने के लिए आपके भीतर धैर्य, बेहतर संवाद के साथ ही संयम होना चाहिये ताकि मरीज की जरूरतों को समझते हुए उसका मनोबल भी बढ़ा सकें। आपमें रोगियों के भीतर विश्वास पैदा करने का भी कौशल होना चाहिए।
कैसे होता है उपचार 
एक प्राकृतिक चिकित्सक का मुख्य काम सिर्फ रोगी का इलाज करना ही नहीं होता, बल्कि उसके खानपान और उसके जीवनशैली में भी बदलाव लाना है, ताकि व्यक्ति जल्द से जल्द ठीक हो सके। इतना ही नहीं, उसे मनोविज्ञान का भी कुछ ज्ञान होना चाहिए ताकि वह रोगी की मानसिक हालत को समझकर उसे बेहतर उपचार दे सके।
योग्यता
इस क्षेत्र में आ रहे छात्रों का भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान में कम से कम 45 प्रतिशत अंक होने चाहिए। इसके बाद आप बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी और यौगिक साइंस कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें डिप्लोमा कोर्स भी करने के साथ ही एक नेचुरोपैथ वेलनेस सेंटर्स, न्यूटिशन सेंटर, हॉस्पिटल, हेल्थ केयर सेंटर आदि में भी अवसर तलाश सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप एकेडमिक्स, कम्युनिटी हेल्थ सर्विस केयर, सोशल वेलफेयर, मैन्युफैक्चरिंग और नेचुरल प्रॉडक्ट्स कंपनी आदि में भी काम कर सकते हैं। भारत में प्राकृतिक चिकित्सक सरकारी और निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्त किए जाते हैं। वैसे लग्जरी होटल व हेल्थ रिसॉर्ट में भी नेचुरोपैथ सर्विसेज दी जाती हैं, वहां पर भी नौकरी मिल सकती है। एक अनुभवी प्राकृतिक चिकित्सक खुद का सेंटर भी खोल सकता है।
आमदनी
एक नेचुरोपैथ यानी प्राकृतिक चिकित्सक का वेतन काफी हद तक उसकी लोकेशन, विशेषज्ञता, योग्यता और अनुभव पर निर्भर करता है। वैसे शुरूआती तौर पर एक नेचुरोपैथ दस हजार से बीस हजार रूपए आसानी से कमा सकता है। एक बार अनुभव प्राप्त करने के बाद आपको आकर्षक वेतन मिल सकता है। 
प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथी, नई दिल्ली।
प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, रांची।
एसडीएम कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगा सांइस, कर्नाटक।
हिमालयन यूनिवर्सिटी, ईटानगर।

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