बच्चों में शुरुआत से ही अच्छी आदतें डालें

बचपन की आदतों का प्रभाव जीवन भर रहता है। इसलिए उनमें अच्छी आदतें डालनी चाहिये।
बचपन से ही हम अपने आस-पास कई चीज़ों को देखते-सुनते हुए बड़े होते हैं और धीरे-धीरे उसे अपने व्यवहार में लाने की कोशिश करते हैं। चाहे-अनचाहे ये आदतें हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती हैं और इन आदतों के कारण हम पहचाने जाने लगते हैं.
छह साल तक के बच्चों पर उनके अभिभावकों का बहुत प्रभाव रहता है। अपने अभिभावकों को कॉपी करके बच्चे बहुत-सी आदतें सीखते हैं। इसलिए अपना व्यवहार बेहतर रखें।
6-12 साल के बीच के बच्चों में कई आदतें विकसित होने लगती हैं। इस दौरान वो स्कूल में जो कुछ भी सीखते हैं, चाहे अच्छी आदतें या बुरी, अगर उन्हें उसमें बढ़ावा मिलता है, तो वे उसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लेते हैं।
12-18 साल तक के बच्चे अपने दोस्तों की तरफ़ ज़्यादा अट्रैक्ट रहते हैं. उनके बीच एडजस्ट होने के लिए और पॉप्युलर बने रहने के लिए वे कई नई आदतें अपनाते हैं, तो कई पुरानी आदतें छोड़ भी देते हैं।
18 साल की उम्र तक बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो जाता है। हर चीज़ के प्रति उनका अपना नज़रिया होता है, जिसे बाद में बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह अभिभावकों की ज़िम्मेदारी है कि 18 साल तक की उम्र के बच्चों को सही परवरिश दें, ताकि जीवन के प्रति उनका नज़रिया सकारात्मक व उत्साहवर्द्धक हो।
आदतें व उनके नकारात्मक प्रभाव
शेयरिंग न करने की आदत: बच्चे स्कूल में दोस्तों के बीच और घर में भाई-बहनों के साथ शेयरिंग की आदत सीखते हैं. लेकिन कुछ बच्चे इस आदत को अपना नहीं पाते, क्योंकि दूसरों के लिए त्याग करना या अपने अहं को छोड़ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।
झूठ बोलने की आदत: ग़लती करने पर अपनी ग़लती को छुपाने के लिए अगर बचपन से ही बच्चे को झूठ बोलने की आदत पड़ जाती जो आगे जाकर और बढ़ जाती है।
उल्टा जवाब देने की आदत: बच्चों को बचपन से ही तहज़ीब और तमीज़ सिखाई जाती है। किससे किस तरह बात करनी चाहिए, किससे क्या कहना है, क्या नहीं कहना है, किसके साथ कैसा व्यवहार करना है? यदि ये आदतें न सीखने की बजाय बच्चा बदतमीज़ी से बात करना और उल्टा जवाब देना सीखेगा, तो आगे जाकर उसे ठीक करना आसान नहीं होगा।
क्या प्रभाव पड़ता है: पार्टनर को उल्टा जवाब देना, उसे नीचा दिखाने की कोशिश करना और अपनी बात को ऊपर रखना- ऐसे लोगों की आदतों में शामिल हो जाता है.
अकेले व चुपचाप रहना: जिन बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती हैऔर दूसरों पर विश्वास नहीं कर पाते, ऐसे बच्चे चुपचाप और अकेले रहना पसंद करते हैं, जो धीरे-धीर उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है
दूसरे की बातों को अहमियत देना: यह एक बहुत अच्छी आदत है, जो बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है और उसके सोचने का तरीक़ा भी अलग होता है, फिर कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि दूसरा व्यक्ति आपके अनुसार सोचेगा।
आत्मनिर्भरता: जिन बच्चों में आत्मनिर्भर रहने की आदत होती है, उनमें बाकी बच्चों की तरह झुंझलाहट या चिड़चिड़ापन नहीं होता।ग़लतियों को सुधारना: जिन बच्चों में बचपन से ही अपनी ग़लती मानने और उसे सुधारने की आदत होती है, उनका कभी किसी से मन-मुटाव नहीं होता।
