भोपाल-इंदौर मेट्रो के लिए अगले हफ्ते करार 

भोपाल । भोपाल, इंदौर मेट्रो के लिए केंद्र, राज्य और मप्र मेट्रो रेल कंपनी के बीच त्रिपक्षीय एमओयू एक हफ्ते में हो जाएगा। इसके बाद प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य सरकार की 20-20 फीसदी की हिस्सेदारी होगी। बाकी राशि मेट्रो रेल कंपनी लोन, पीपीपी व अन्य जरियों से जुटाएगी। ऐसे में प्रोजेट को अमलीजामा पहनाने में फंड की कमी नहीं होगी।
 मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में पिछले महीने मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान एमओयू करने का फैसला लिया गया था। इस पर केबिनेट की मुहर लग गई थी। एमओयू 23 जुलाई को दिल्ली में होना था। बताया जा रहा है तब विधानसभा चल रही थी। ऐसे में नगरीय विकास मंत्री जयवद्र्धन सिंह दिल्ली नहीं जा पाए थे और एमओयू नहीं हो पाया। अब एक हते में यह होने की बात कही जा रही है।
राजधानी में करोंद से एम्स और डिपो चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक मेट्रो के दो कॉरीडोर बनाने पर 6962.92 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। शुरुआत में ईआईबी से 3885 करोड़ रुपए फायनेंस करने के लिए बात की गई। तय किया गया कि बाकी 20 फीसदी पैसा केंद्र देगा। राज्य सरकार 25 फीसदी से ज्यादा राशि प्रोजेक्ट के लिए देगी। कुछ महीने पहले इसमें बदलाव कर दिया गया। ईआईबी से लोन की राशि दस फीसदी कम कर दी गई। खास बात यह है कि ईआईबी से यह लोन जीरो परसेंट ब्याज पर मिलेगा। राज्य का हिस्सा 25 से 20 प्रतिशत कर दिया गया। मेट्रो रेल कंपनी इस पौने चार सौ करोड़ रुपए की भरपाई पीपीपी से करेगी। यानि निजी भागीदारी से यह पैसा जुटाया जाएगा।

पहले चरण में आएगा 277 करोड़ का खर्च 
राजधानी में पहले चरण में मेट्रो के दो रूट बनाए जाना हैं। शुरुआत एम्स से सुभाष नगर तक के हिस्से से की गई है। यहां सवा छह किमी लंबा जमीन से ऊपर एलिवेटेड रूट बनाया जाएगा। इस पर 277 करोड़ रुपए खर्च होगा। दिलीप बिल्डकॉन को इसका जिमा दिया गया है। ढाई साल में इसका निर्माण करना होगा। कंपनी ने पिछले साल नवंबर में काम शुरू कर दिया था। तब से जियो टेनिकल समेत अन्य सर्वे चल रहे हैं। यहां ध्यान देने लायक बात यह है कि भोपाल के साथ ही इंदौर में भी रूट निर्माण का जिमा दिलीप बिल्डकॉन को सौंपा गया है। वहां भी निर्माण पर करीब 250 करोड़ रुपए खर्च होंगे। दोनों प्रोजेट के लिए सभी अनुमतियां मिल चुकी हैं।

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