International Tiger Day:देश में 20 फीसदी तक बढ़ सकती है बाघों की संख्या

दुनियाभर में बाघों की तेजी से घटती संख्या के प्रति संरक्षण के लिए जागरुकता फैलाने को लेकर प्रति वर्ष 29 जुलाई को ‘वर्ल्ड टाइगर डे’ मनाया जाता है। ‘ऑल इंडिया टाइगर एसोसिएशन’ 2018 की जनसंख्या रिपोर्ट मंगलवार को पेश होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि देश में बाघों की संख्या 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।

अगर मंगलवार को रिपोर्ट जारी हुई तो यह चौथी जनसंख्या रिपोर्ट होगी। इससे पहले 2006, 2010 और 2014 में रिपोर्ट जारी हो चुकी है, जिसमें क्रमश: 1411, 1706 और 2226     बाघ होने की पुष्टि की गई थी। लगातार हो रही वृद्धि से माना जा रहा है कि इस बार भी संख्या बढ़ेगी। इस बार बाघों की गणना के लिए नई तकनीक का सहारा लिया गया है।  

  • आठ साल में बढ़ गए 800 से ज्यादा बाघ
  • 1411 बाघ थे देश में 2006 की गणना के अनुसार
  • 2226 हो गया यह आंकड़ा बढ़कर 2014 में 
  • 406 बाघ कर्नाटक में सबसे ज्यादा 
  • 340 बाघों के साथ उत्तराखंड दूसरे नंबर पर 

कहां कितने बाघ
स्थान        2006        2010        2014
उत्तराखंड    178        227        340
उत्तर प्रदेश    109        118        117
बिहार        10        8        28
आंध्र+तेलंगाना     95        72        68
छत्तीसगढ़    26        26        46
मध्य प्रदेश    300        257        308
महाराष्ट्र        103        169        190
ओडिशा        45        32        28
राजस्थान    32        36        45
झारखंड        —        10        3
कर्नाटक        290        300        406
केरल        46        71        136
तमिलनाडु    76        163        229
गोवा        —        —        5
असम        70        143        167
अरुणाचल प्रदेश 14        —        28
मिजोरम            6    5        3
उत्तर पश्चिम बंगाल    10    —        3
सुंदरबन            —    70        76
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कुल        1411         1706        2226    

 

जनगणना पद्धति
2006 से पहले, देश भर के वन विभागों ने पद चिह्नों के आधार पर गणना की थी। 
इसके बाद की रिपोर्ट में कैमरे और तकनीक का इस्तेमाल किया गया। 
इस बार लगभग 15,000 कैमरे लगाए गए हैं
2006 में लगभग 9700 कैमरे लगाए गए थे। 

नई तकनीक
गणना के लिए इस बार एम-स्ट्रीप्स सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है। 
यह फोटो के जियो टैगिंग के माध्यम से निष्कर्षों को प्रमाणित करता है। 
इससे बाघों की संख्या का अधिक सटीक मूल्यांकन होता है। 

सबसे बड़ा सर्वे
यह दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है। इसके लिए सरकार ने 10.22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रोजेक्ट टाइगर की केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से राज्यों को 7 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। 

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