आदित्य ठाकरे का प्रहार: “महिला आरक्षण बिल नहीं, यह सत्ता के विस्तार का गुप्त रास्ता था।”

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख नेता आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि अगर यह सफल हो जाता, तो यह भारतीय संविधान के मूल्यों की "पूर्ण पराजय" होती। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए ठाकरे ने केंद्र की मंशा पर गंभीर संदेह व्यक्त किए हैं।

चुनावी फायदे के लिए परिसीमन का उपयोग

आदित्य ठाकरे का आरोप है कि इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य महिलाओं का उत्थान करना नहीं, बल्कि राजनीतिक जोड़-तोड़ था। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण को 'परिसीमन' से जोड़कर सरकार लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या को अपने अनुकूल ढालना चाहती थी। ठाकरे के अनुसार, इस प्रक्रिया से कई राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाता और कुछ विशेष दलों को चुनाव में अनुचित लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाता।

तत्काल आरक्षण की मांग

विधेयक की टाइमलाइन पर सवाल उठाते हुए आदित्य ठाकरे ने इसे "छलावा" करार दिया। उन्होंने कहा:"अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को अधिकार देना चाहती है, तो उसे 2029 तक प्रतीक्षा करने की कोई जरूरत नहीं है। वर्तमान की 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही तुरंत 33 फीसदी कोटा लागू किया जा सकता है। सीटों की संख्या बढ़ाने के पीछे केवल सत्ता के केंद्रीकरण की मंशा झलकती है।"

विपक्षी एकता ने रोका 'रास्ता'

लोकसभा में इस बिल के पारित न हो पाने को ठाकरे ने विपक्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने एकजुटता की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के कड़े विरोध के कारण ही सरकार अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सकी। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आरक्षण मिलना ही चाहिए, लेकिन उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि चुनावी लाभ की दृष्टि से प्रेरित।

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