AAP का एक्शन मोड, BJP जॉइन करने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने का मामला अब और गहरा गया है। पार्टी ने इसे केवल 'राजनीतिक उलटफेर' नहीं, बल्कि 'संवैधानिक उल्लंघन' करार देते हुए अब कानूनी और संवैधानिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

AAP की अगली रणनीति: राष्ट्रपति और सभापति से गुहार

आम आदमी पार्टी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।

  • संवैधानिक शिकायत: AAP नेतृत्व ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से औपचारिक शिकायत करने का निर्णय लिया है।

  • सदस्यता रद्द करने की मांग: पार्टी इन सातों सांसदों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग करेगी। उनका तर्क है कि यह दलबदल कानून का खुला उल्लंघन है।

  • रिकॉल की मांग: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस मामले में और आक्रामक रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति से मिलकर पंजाब से चुने गए इन सांसदों को 'वापस बुलाने' (रिकॉल) की प्रक्रिया पर चर्चा की मांग रखने वाले हैं।

कानूनी पेच: क्या 2/3 का दावा टिकेगा?

विवाद का मुख्य केंद्र राघव चड्ढा समेत सातों सांसदों का यह तर्क है कि वे 'दो-तिहाई' संख्या बल के साथ बीजेपी में विलय कर रहे हैं, जो कानूनन मान्य है। हालांकि, इस पर कानूनी जानकारों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा है कि, "किसी पार्टी का विलय पूरी संगठनात्मक सहमति से होता है। कुछ सांसदों का अपनी मर्जी से दूसरी पार्टी में चले जाना 'विलय' नहीं, बल्कि 'दलबदल' है।" यह मामला अब अदालती गलियारों तक पहुँचने के पूरे आसार हैं।

एजेंसियों की भूमिका पर सवाल और बीजेपी का बचाव

इस पूरे घटनाक्रम के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है:

  • AAP का आरोप: दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों (ED/CBI) का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने अशोक मित्तल के ठिकानों पर हालिया छापेमारी को पार्टी को अंदर से तोड़ने की 'साजिश' बताया। संजय सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि, "जो नेता बीजेपी में शामिल हो जाते हैं, वे रातों-रात भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो जाते हैं।"

  • BJP का पक्ष: वहीं, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि AAP नेतृत्व अपनी गिरती लोकप्रियता और आंतरिक कलह से हताश होकर बेबुनियाद बयान दे रहा है। बीजेपी का कहना है कि सांसद अनुभवी हैं और वे लंबे समय से AAP के कामकाज से असंतुष्ट थे, इसलिए उन्होंने अपनी मर्जी से पार्टी बदली है।

कौन-कौन हैं बागी सांसद?

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल के इस कदम ने राज्यसभा में AAP की ताकत को तगड़ा झटका दिया है।

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