जम्मू में तवी नदी के किनारों का होगा कायाकल्प, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

जम्मू: अगस्त 2025 में तवी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने जम्मू के कई इलाकों में जो जख्म दिए थे, प्रशासन अब उन्हें भरने के साथ-साथ भविष्य के लिए सुरक्षा कवच तैयार करने में जुट गया है। पीरखोह, राजीव कॉलोनी और विक्रम चौक जैसी बस्तियों को डूबने से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने तवी नदी के तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया है। पिछले तीन दिनों से भारी मशीनरी की मदद से नदी के किनारों को समतल करने और सुरक्षा दीवार बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत महसूस की है।

आपदा से बचाव के लिए 'सुरक्षा दीवार' का निर्माण

जल शक्ति और पर्यावरण मंत्री जावेद अहमद राणा द्वारा शिलान्यास किए जाने के बाद अब धरातल पर काम दिखने लगा है। परियोजना के तहत विक्रम चौक के पास बाएं तटबंध की बहाली और उसे मजबूती प्रदान करने के लिए 3.05 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस कार्य को आगामी 6 से 9 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही हरि सिंह पार्क के पास क्षतिग्रस्त हुए दाएं तट के सुरक्षा कार्यों के पुनर्निर्माण पर 82 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसकी समय सीमा 2 वर्ष निर्धारित की गई है। लोक निर्माण विभाग ने विक्रम चौक से राजीव कॉलोनी तक करीब 150 मीटर का पहुंच मार्ग तैयार कर लिया है ताकि निर्माण सामग्री और मशीनरी की आवाजाही निर्बाध रूप से हो सके।

सुरक्षा के साथ पर्यटन का नया केंद्र

यह परियोजना केवल बाढ़ से बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शहर के एक प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित करने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा दीवार का निर्माण पूर्ण होने के बाद इसके ऊपरी हिस्से पर 'वाक-वे' और 'ग्रीन बेल्ट' विकसित किए जाएंगे। इससे तवी का तट न केवल सुरक्षित होगा, बल्कि शहरवासियों के लिए टहलने और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए एक सुंदर स्थल के रूप में भी उभरेगा। यह पहल जम्मू शहर में 'रिवर फ्रंट' विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

पिछली बाढ़ की कड़वी यादें और नई उम्मीद

अगस्त 2025 की बाढ़ में तवी का जलस्तर जिस तरह बढ़ा था, उसने राजीव कॉलोनी और विक्रम चौक जैसे इलाकों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। स्थानीय निवासी राकेश भल्ला बताते हैं कि उस दौरान सब कुछ खो देने का डर इतना गहरा था कि लोग महीनों तक दहशत में रहे। अब सरकार द्वारा सुरक्षा दीवार बनाने के कदम से लोगों में यह विश्वास जागा है कि भविष्य में मानसून के दौरान उन्हें अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा। तटबंधों के मजबूत होने से हजारों परिवारों को अब 'चैन की नींद' आने की उम्मीद है।

Leave a Reply