आरएमएल अस्पताल में कथित लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली। देश की राजधानी के नामचीन चिकित्सा संस्थान डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक चौंकाने वाली घटना के बाद गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। अस्पताल के प्रबंधन ने इलाज करा रहे एक जीवित व्यक्ति को कागजों पर मृत घोषित कर दिया और बाकायदा उसकी डेथ समरी के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र भी थमा दिया। इस कथित लापरवाही ने न केवल अस्पताल प्रशासन की साख को हिलाकर रख दिया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों की दस्तावेजी सटीकता और संवेदनशीलता की पोल भी खोल दी है।
जीवित व्यक्ति को कागजों में दी गई मौत
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे विचलित करने वाली बात यह रही कि अस्पताल की ओर से जितेंद्र कुकरेती नामक मरीज को आधिकारिक रूप से मृत मान लिया गया, जबकि उनकी सांसें चल रही थीं। अस्पताल ने बिना किसी गहन जांच या भौतिक सत्यापन के मृत्यु से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज तैयार कर दिए। जैसे ही यह बात सामने आई कि मरीज जिंदा है, वैसे ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष प्रकट किया।
श्वान हमले के बाद भर्ती हुए थे जितेंद्र
अशोक विहार के रहने वाले 51 वर्षीय जितेंद्र कुकरेती की आपबीती अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी, जब उन पर आवारा कुत्तों ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस हादसे के बाद उन्हें उपचार हेतु 18 अप्रैल को आरएमएल अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार उनका इलाज चल रहा था, लेकिन इसी दौरान अस्पताल के तंत्र ने ऐसी बड़ी चूक कर दी जिससे उनके जीवित होने के बावजूद सरकारी फाइलों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया।
अस्पताल के दस्तावेजी तंत्र पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद अब यह बहस छिड़ गई है कि एक प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी करने से पहले कितनी सतर्कता बरती जाती है। जनरल सर्जरी विभाग और अस्पताल के अन्य संबंधित अनुभागों के बीच तालमेल की कमी स्पष्ट रूप से उजागर हुई है। प्रशासन अब इस बात की तफ्तीश में जुटा है कि किस स्तर पर यह मानवीय या तकनीकी त्रुटि हुई जिसने एक परिवार को मानसिक यंत्रणा दी और जीवित व्यक्ति के अस्तित्व को ही कागजों में मिटा दिया।
