कांग्रेस नेता बोले- पश्चिम बंगाल की स्थिति संभालना आसान नहीं

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाल के चुनाव परिणामों और सत्ता के समीकरणों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने जिस तरह के नतीजों को देखा है, उसे स्वीकार करना उनके लिए मुश्किल है और वर्तमान परिस्थितियों को संभालना सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

"विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना होगा बड़ा आंदोलन"

बीजेपी की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए हुसैन दलवई ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के दम पर पूरे देश पर कब्जा करने का सपना कभी सच नहीं होगा। उन्होंने ममता बनर्जी और राहुल गांधी के स्टैंड का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब सभी विपक्षी दलों को संगठित होना चाहिए। दलवई ने जोर देकर कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने के लिए एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत है।

बंगाल की कमान और शुभेंदु अधिकारी का बढ़ता कद

बंगाल में मिली जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा शुभेंदु अधिकारी को राज्य की कमान सौंप सकती है। शुभेंदु ने इस चुनाव में अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए दो सीटों पर जीत दर्ज की है। विशेष रूप से भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को मात देकर उन्होंने अपनी राजनीतिक हैसियत को और मजबूत कर लिया है। 1995 में कांग्रेस से पार्षद के रूप में करियर शुरू करने वाले शुभेंदु अब बंगाल बीजेपी के सबसे बड़े चेहरों में शुमार हो चुके हैं।

मराठी अनिवार्यता के मुद्दे पर भी घेरा

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले पर भी हुसैन दलवई ने अपनी राय रखी। उन्होंने इस फैसले को तर्कहीन बताते हुए कहा कि यह भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियमों की सख्ती केवल छोटे तबके के रिक्शा चालकों के लिए ही है? अगर अधिकारियों को मराठी नहीं आती तो क्या उन पर भी इसी तरह की पाबंदी लागू होगी? दलवई के मुताबिक, इस तरह के फैसले व्यवहारिक नहीं हैं।

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