FMCG संकट से बढ़ेगी जनता की परेशानी, रोजमर्रा का सामान होगा महंगा

मुंबई: रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने वाली है। साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान (FMCG) जल्द ही महंगे होने जा रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पैकेजिंग सामग्री की लागत में उछाल और ईंधन के महंगे होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है, जिसकी भरपाई के लिए अब कीमतों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी की तैयारी है।
कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी उछाल
एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे न केवल कच्चा माल महंगा हुआ है, बल्कि माल ढुलाई और पैकेजिंग के खर्च में भी भारी इजाफा हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे पहले ही 3 से 5 प्रतिशत तक दाम बढ़ा चुकी हैं, लेकिन लागत का बोझ इतना अधिक है कि आने वाले समय में एक और दौर की मूल्य वृद्धि अनिवार्य हो गई है।
पैकेट का वजन घटाने और खर्चों में कटौती की रणनीति
महंगाई से निपटने के लिए कंपनियां केवल दाम ही नहीं बढ़ा रही हैं, बल्कि 'ग्रामेज कट' यानी पैकेट में सामान की मात्रा घटाने की रणनीति भी अपना रही हैं। इसके साथ ही, विज्ञापनों और प्रमोशन पर होने वाले खर्चों में कटौती की जा रही है और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को अधिक कुशल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, कंपनियां 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक की कीमतों और वजन को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि निम्न और मध्यम आय वर्ग के ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े।
दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने दिए संकेत
उद्योग जगत के बड़े नामों ने मौजूदा स्थिति को बेहद अस्थिर बताया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के अनुसार, उन पर करीब 8 से 10 प्रतिशत महंगाई का बोझ पड़ा है, जिसके जवाब में कीमतों में कुछ वृद्धि की गई है। डाबर इंडिया और ब्रिटानिया जैसी कंपनियों ने भी स्वीकार किया है कि पैकेजिंग और ईंधन की लागत में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। नेस्ले इंडिया के प्रबंधन का मानना है कि भविष्य का सटीक अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है, इसलिए बाजार की हर परिस्थिति के लिए तैयारी की जा रही है।
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
आने वाले महीनों में ब्यूटी प्रोडक्ट्स, पेय पदार्थ, और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुओं की कीमतों में 4 से 10 प्रतिशत तक की और बढ़ोतरी देखी जा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में नरमी नहीं आती है, तो मध्यम वर्ग को अपने मासिक खर्चों में बड़ी कटौती करनी पड़ सकती है। फिलहाल, सभी बड़ी कंपनियां बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतें बढ़ाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
