ट्विशा केस में जांच तेज, आरोपी का एम्स में होगा मेडिकल

भोपाल। राजधानी के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार (28 मई 2026) को एक बेहद कड़ा कदम उठाते हुए मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह को हिरासत में ले लिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कटारा हिल्स स्थित उनके निवास स्थान के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। किसी भी अप्रिय स्थिति या हंगामे से बचने के लिए प्रशासन ने पूरे इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए थे। गौरतलब है कि हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने निचली अदालत के निर्णय को पूरी तरह पलटते हुए आरोपी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद से ही उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी।
चार घंटे की सघन पूछताछ के बाद अरेस्टिंग, एम्स में होगा मेडिकल टेस्ट
उच्च न्यायालय से अग्रिम राहत का सुरक्षा कवच हटते ही सीबीआई की विशेष टीम तड़के गिरिबाला सिंह के बंगले पर धमक पड़ी। जांच अधिकारियों ने घर के भीतर करीब चार घंटे से भी अधिक समय तक आरोपी से गहन पूछताछ की और संतुष्ट न होने पर आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तय प्रक्रिया के मुताबिक, सीबीआई सबसे पहले गिरिबाला को भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS – एम्स) लेकर जाएगी, जहां उनका विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल टेस्ट) कराया जाएगा। इसके तुरंत बाद उन्हें विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने के लिए केंद्रीय एजेंसी अब पूरी तरह एक्टिव मोड में आ चुकी है। केस की गहराई से तफ्तीश करने के उद्देश्य से सीबीआई भोपाल में ही अपना एक विशेष 'इन्वेस्टिगेशन कैंप' (जांच कार्यालय) स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सीबीआई के आला अफसरों ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को एक आधिकारिक पत्र लिखकर सुरक्षित स्थान की मांग की है। इस विशेष दफ्तर में केस से जुड़े तमाम संवेदनशील साक्ष्यों, बयानों और फॉरेंसिक दस्तावेजों को कड़े पहरे में सुरक्षित रखा जाएगा।
'मौत से पहले ट्विशा को दी गई थी भयानक यातनाएं' – महाधिवक्ता
इस न्यायिक घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। माननीय न्यायालय ने मुख्य रूप से मृतका ट्विशा शर्मा के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज शरीर पर मिले उन 7 गहरे जख्मों (घावों) का विशेष तौर पर उल्लेख किया है, जो उसकी मौत से ठीक पहले के थे।
महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि यदि मामला केवल आत्महत्या का होता, तो मरने से पहले शरीर पर इस तरह के गंभीर चोट के निशान होना नामुमकिन था। इसलिए प्रथम दृष्टया यह साफ तौर पर प्रमाणित होता है कि ट्विशा शर्मा को मौत के मुंह में धकेलने से पहले मानसिक और शारीरिक रूप से घोर क्रूरता और यातनाओं का शिकार बनाया गया था।
निचली अदालत की जल्दबाजी पर हाई कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति
प्रशांत सिंह ने आगे बताया कि ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) द्वारा आरोपी गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत का फायदा देने में भारी जल्दबाजी दिखाई गई थी, जो वैधानिक रूप से उचित नहीं थी। उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य उजागर करते हुए कहा कि गिरिबाला सिंह ने पुलिस में मुख्य एफआईआर (FIR) दर्ज होने से पहले ही अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगा दी थी।
नियमों के मुताबिक, जब तक मामले की प्रारंभिक विवेचना (जांच) पूरी नहीं हो जाती और ठोस सबूत एकत्र नहीं कर लिए जाते, तब तक ऐसी राहत नहीं दी जानी चाहिए थी, परंतु निचली अदालत ने पुलिस को साक्ष्य जुटाने का मौका दिए बिना ही आरोपी को अग्रिम संरक्षण दे दिया था। इन्हीं पुख्ता और न्यायसंगत आधारों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस त्रुटिपूर्ण जमानत आदेश को पूरी तरह खारिज और शून्य घोषित कर दिया।
