पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को मिलेगी आजादी: गाड़ी के इंजन के हिसाब से खुद चुन सकेंगे इथेनॉल ब्लेंड

नई दिल्ली | आने वाले समय में जब आप अपने वाहन में ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर जाएंगे, तो आपको वहां ईंधन के कई नए विकल्प देखने को मिलेंगे। केंद्र सरकार एक ऐसी दूरदर्शी योजना पर तेजी से काम कर रही है, जिसके तहत वाहन चालक अपनी गाड़ी के इंजन की क्षमता और बनावट के अनुसार खुद यह चुन सकेंगे कि उन्हें कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल खरीदना है। सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—के साथ-साथ जियो-बीपी, नायरा एनर्जी और शेल जैसी निजी कंपनियों को भी ई20, ई22, ई25 और ई30 श्रेणी का ईंधन बेचने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यहाँ ई20 का मतलब है कि उस पेट्रोल में 80 फीसदी शुद्ध पेट्रोल और 20 फीसदी इथेनॉल का मिश्रण है।
उपभोक्ताओं की आशंकाएं: माइलेज और इंजन की सुरक्षा
सरकार के इस बड़े फैसले के बीच उपभोक्ताओं के मन में नए ईंधन को लेकर दो मुख्य चिंताएं बनी हुई हैं। पहली चिंता गाड़ी के माइलेज को लेकर है; चूंकि इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम होता है, इसलिए पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से गाड़ी का औसत (माइलेज) घटने का डर रहता है। हालांकि, सरकारी दावों के मुताबिक ई20 ईंधन से गाड़ी का पिकअप और परफॉर्मेंस बेहतर होता है और माइलेज पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ता। दूसरी बड़ी आशंका इंजन की लाइफ को लेकर है। दरअसल, इथेनॉल में नमी (मॉइस्चर) सोखने की क्षमता होती है, जिससे पुराने इंजनों के रबर पार्ट्स, पाइप और प्लास्टिक के पुर्जे खराब होने या इंजन में जंग लगने का जोखिम बढ़ जाता है।
पेट्रोल पंपों का आधुनिकीकरण और अलग-अलग वेरिएंट
इस नई व्यवस्था को धरातल पर लागू करने के लिए देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों पर कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। पंपों पर अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल की बिक्री के लिए अलग डिस्पेंसिंग नोजल, नए अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और ब्लेंडिंग कंट्रोल सिस्टम स्थापित करने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया बहुत अधिक जटिल या खर्चीली नहीं होगी, क्योंकि वर्तमान में मौजूद प्रीमियम और रेगुलर ईंधन वाले सिस्टम का ही विस्तार किया जा सकता है। इस बदलाव का पूरा वित्तीय भार तेल कंपनियां खुद संभालेंगी। इसके साथ ही, ग्राहकों की सहूलियत के लिए पेट्रोल पंप की मशीनों पर स्पष्ट अक्षरों में इथेनॉल के वेरिएंट और उनकी अलग-अलग कीमतें प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी तरह के भ्रम से बचा जा सके।
विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण को बड़ा फायदा
वैश्विक तेल संकट के इस दौर में भारत का यह रणनीतिक कदम देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है। नवंबर 2014 से फरवरी 2026 के बीच इथेनॉल मिश्रण नीति की बदौलत भारत ने करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा की बचत की है। इसके साथ ही, पर्यावरण के मोर्चे पर कार्बन उत्सर्जन में 8.7 करोड़ टन की कमी आई है, जो कि लगभग 35 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। मार्च 2026 तक देश में इथेनॉल का उत्पादन बढ़कर 20 अरब लीटर के स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि मौजूदा 20 फीसदी मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केवल 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। उत्पादन की इस अतिरिक्त क्षमता का सही इस्तेमाल करने और किसानों व चीनी मिलों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए बाजार में ई22 और ई30 जैसे उच्च मिश्रण वाले विकल्प उतारना बेहद जरूरी हो गया है।
