सड़क पर बिस्तर और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा: हनुमानगढ़ में मांगों को लेकर अड़े किसान, हाईवे पूरी तरह जाम

हनुमानगढ़ | न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की अंतिम तिथि बढ़ाने और पर्याप्त मात्रा में बारदाना (बोरे) उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा में दो दिनों तक उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के समक्ष धरना देने के बाद, शुक्रवार को किसानों ने सूरतगढ़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। वहीं दूसरी ओर, गोलूवाला में भी किसानों ने उपतहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन पड़ाव डाल दिया है। इससे पहले गुरुवार को पीलीबंगा में किसान प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ता रही पूरी तरह बेनतीजा

गुरुवार को आंदोलन को शांत कराने के लिए जिला मुख्यालय से अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) उम्मेदीलाल मीणा खुद पीलीबंगा पहुंचे थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को तुरंत 75 हजार बारदाना उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान नेताओं ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा कि वर्तमान में मंडियों के हालातों को देखते हुए कम से कम 8 लाख कट्टों की आवश्यकता है। किसान नेताओं का कहना है कि स्थानीय अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, जबकि गेहूं खरीद का लक्ष्य तय करने और इसकी अंतिम तारीख को आगे बढ़ाने का वास्तविक अधिकार राज्य सरकार के स्तर पर है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मध्यस्थता का कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है।

सूरतगढ़ हाईवे पर चक्काजाम और गोलूवाला में पड़ाव शुरू

प्रशासन के साथ बातचीत टूटने के बाद किसानों ने अपनी पूर्व घोषणा के तहत शुक्रवार सुबह सूरतगढ़ रोड पर गद्दे और अवरोधक लगाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि यह उनकी उपज और हक की आर-पार की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी। इसी बीच, गोलूवाला उपतहसील के सामने भी किसानों ने तंबू गाड़ दिए हैं। यहाँ स्थानीय व्यापारियों ने भी बारदाना वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि सरकारी तंत्र द्वारा बारदाने के आवंटन में भारी अनियमितता बरती गई है और चहेते लोगों को इसका फायदा पहुंचाया गया है।

रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद लक्ष्य कम, बारदाने और स्लॉट ने बढ़ाई मुसीबत

जिले में इस सीजन के लिए सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य 7.52 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था, जिसका लगभग 90 फीसदी हिस्सा कागजों में पूरा हो चुका है। हालांकि, हकीकत यह है कि इस बार जिले में गेहूं की बुवाई का क्षेत्र करीब 6 प्रतिशत बढ़ा है और उत्पादन भी पिछले साल से काफी अधिक हुआ है। सरकारी लक्ष्य कम होने के कारण अभी भी मंडियों में गेहूं के विशाल ढेर खुले में पड़े हुए हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों और मंडियों से अनाज का उठाव न होने के कारण किसान कई दिनों से केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों और व्यापारिक संगठनों की मांग है कि खरीद की समय सीमा को बढ़ाकर 30 जून किया जाए, ताकि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचने पर मजबूर न होना पड़े।

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