परीक्षा में गड़बड़ी पर आदित्य ठाकरे का बड़ा बयान: ‘नौजवानों के भविष्य से हुआ खिलवाड़, शिक्षा मंत्री तुरंत दें इस्तीफा’

मुंबई | शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं में सामने आई विसंगतियों को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इन महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई लापरवाही न केवल परीक्षा आयोजित करने वाले बोर्ड और मंत्रालय की नाकामी को दर्शाती है, बल्कि यह देश के होनहार और कठिन परिश्रम करने वाले युवाओं के वैश्विक स्तर पर भरोसे, मान-सम्मान और रोजगार के अवसरों को भी गहरी ठेस पहुंचाती है।
शीर्ष अधिकारियों और जिम्मेदार बोर्ड सदस्यों को हटाने की मांग
आदित्य ठाकरे ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक इस बड़ी लापरवाही के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक पीड़ित छात्रों को न्याय मिलना नामुमकिन है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान शिक्षा मंत्री, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और सीबीएसई बोर्ड के शीर्ष पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से बर्खास्त किया जाना चाहिए। युवा नेता ने कहा कि जिन लोगों ने नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा का पर्चा लीक किया और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में धांधली की या उसे ठीक से लागू करने में नाकाम रहे, उन्हें जब तक सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक साल 2047 के 'विकसित भारत' की बातें करना पूरी तरह से बेमानी है।
दोबारा परीक्षा और डिजिटल मार्किंग में गड़बड़ियों से छात्रों में रोष
यह तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब देश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित कराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीबीएसई कक्षा 12वीं की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गई हैं। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान न होने, धुंधले स्कैन और नंबरों की गिनती में गंभीर त्रुटियों के मामले सामने आने के बाद हजारों विद्यार्थियों ने री-चेकिंग (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन किया है। ठाकरे ने चेताया कि जब तक पूरी शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार नहीं किए जाते, तब तक भविष्य में किसी बेहतर परिणाम की उम्मीद करना बेकार है।
विपक्षी दलों ने घेरा और छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर के छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरा असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने इसे देश की समूची शिक्षा प्रणाली की विफलता करार देते हुए केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। वर्तमान में महाराष्ट्र के कई हिस्सों में छात्र संगठनों द्वारा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों ने भी इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि देश की मुख्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बार-बार होने वाली ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक खामियां न केवल युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को भी कमजोर कर रही हैं।
