सीबीएसई को लेकर राहुल गांधी का बड़ा दावा, टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली (ओएसएम) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और तकनीकी घोटाले में बदल गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई और केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बोर्ड अब छात्रों की जेब कतरने का जरिया बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई की अपनी गलतियों को सुधारने और उत्तर पुस्तिका की सही जांच कराने के लिए एक मजबूर छात्र को करीब 2,000 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
राहुल गांधी का आरोप है कि इस साल परीक्षा देने वाले करीब साढ़े 18 लाख छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर एक निजी कंपनी को मोटा फायदा पहुँचाया गया है। उनके अनुसार, मई 2025 में जारी शुरुआती टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर और 300 डीपीआई रिज़ॉल्यूशन से स्कैनिंग की सख्त और अनिवार्य शर्त रखी गई थी। लेकिन अगस्त के संशोधित टेंडर में इन नियमों में ढील देकर रिज़ॉल्यूशन को घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया, ताकि एक खास निजी वेंडर 'सीओईएमपीटी एजू टेक' को इसका ठेका मिल सके।
मोबाइल से स्कैनिंग और नतीजों में भारी गिरावट
आरोप है कि टेंडर मिलने के बाद वेंडर ने कॉपियों को किसी पेशेवर स्कैनर के बजाय सामान्य मोबाइल फोन से स्कैन किया। इसके प्रमाण के रूप में छात्रों को मिली डिजिटल कॉपियों पर परछाई (ड्रॉप शैडो) और पन्नों को मोड़ने के निशान साफ नजर आ रहे हैं, जो केवल मोबाइल से फोटो खींचने पर ही आते हैं। इस भारी तकनीकी लापरवाही के कारण मूल्यांकन में बड़ी गड़बड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर धुंधली कॉपियों, गायब पन्नों और बिना जांचे गए जवाबों के स्क्रीनशॉट की बाढ़ आ गई है, यहाँ तक कि कई छात्रों को दूसरों की उत्तर पुस्तिकाएं तक भेज दी गईं। इस अव्यवस्था का सीधा असर नतीजों पर पड़ा है, जिससे 12वीं का पास प्रतिशत पिछले साल के 88.39% से गिरकर 85.2% रह गया है और कंपार्टमेंट के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
"गलती सीबीएसई की, कमाई सरकार की"
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर 'जेबकतरों से सावधान' लिखते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सीबीएसई की गलती के कारण अगर किसी बच्चे के नंबर गलत आते हैं, तो उसे सुधारने के लिए एक भारी-भरकम बिल थमा दिया जाता है। इसमें प्रति विषय डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए 700 रुपए, पुनर्गणना (री-टोटलिंग) के लिए 500 रुपए और प्रति सवाल पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्युएशन) के लिए 100 रुपए वसूले जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब करीब 4 लाख बच्चों ने इसके लिए आवेदन किया है, तो अंदाजा लगाइए कि सीबीएसई कितनी मोटी कमाई कर रहा है। स्कैनिंग फोन से होने के कारण गलत मार्किंग तय थी, लेकिन उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। इससे पहले राहुल गांधी ने पीड़ित छात्रों से बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया था, जिसमें छात्रों ने बताया कि सोशल मीडिया पर आवाज उठाने पर उन्हें ट्रोल किया गया और देशद्रोही तक कहा गया।
कमजोर सुरक्षा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
इस घोटाले में एक और बड़ा खुलासा एथिकल हैकर्स ने किया है। उनका दावा है कि इस डिजिटल पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था इतनी घटिया है कि कोई भी आम इंटरनेट यूजर किसी भी छात्र की कॉपियों को आसानी से देख और डाउनलोड कर सकता है, जिससे छात्रों की गोपनीयता खतरे में पड़ गई है। वहीं, कॉपियों को ठीक कराने की भारी मांग के कारण बोर्ड का पुनर्मूल्यांकन पोर्टल भी लगातार क्रैश हो रहा है। विपक्ष ने इस पूरी व्यवस्था को छात्रों के साथ एक बड़ी धोखाधड़ी करार देते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
