आम जनता पर महंगाई का दोहरा वार: पेट्रोल की कीमतों ने छुआ ₹130 का आंकड़ा, केरोसिन के दाम बढ़ने से मचा हाहाकार

नई दिल्ली | वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दामों में हो रही उथल-पुथल का असर अब भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में साफ देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल और केरोसिन की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि बीते महज छह हफ्तों के भीतर बांग्लादेशी सरकार द्वारा ईंधन की दरों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस नए मूल्य संशोधन के बाद वहां पेट्रोल की कीमतें 130 टका प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। प्रशासन का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते दबाव के चलते कीमतों को बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया था, लेकिन इस फैसले ने आम जनता के बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।

छह सप्ताह में दूसरी बार लगा झटका, पेट्रोल की कीमतें 130 टका के पार

बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, देश में पेट्रोल की खुदरा कीमत अब बढ़कर 130 टका प्रति लीटर से ऊपर निकल चुकी है। मात्र डेढ़ महीने के भीतर दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ने से आम वाहन चालकों और मध्यम वर्ग में भारी असंतोष है। इस फैसले का सबसे पहला और सीधा असर निजी कार और बाइक मालिकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब रोजमर्रा के सफर के लिए अपनी जेब काफी ज्यादा ढीली करनी होगी। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर की लागत बढ़ने से माल ढुलाई भी महंगी होने की कगार पर पहुंच गई है।

निम्न वर्ग पर दोहरी मार, केरोसिन और डीजल के दाम भी आसमान पर

सरकार ने इस बार केवल पेट्रोल ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण ईंधनों—केरोसिन और डीजल की कीमतों में भी भारी इजाफा किया है। केरोसिन (मिट्टी का तेल) का इस्तेमाल बांग्लादेश के ग्रामीण अंचलों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बेहद गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग खाना पकाने व रोशनी के लिए करते हैं। ऐसे में केरोसिन के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर गरीब परिवारों का चूल्हा प्रभावित होगा। वहीं दूसरी ओर, डीजल महंगा होने से सार्वजनिक परिवहन की बसें, थ्री-व्हीलर्स और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पंपिंग सेट व ट्रैक्टर चलाना भी काफी खर्चीला हो जाएगा।

भू-राजनीतिक तनाव और आयात निर्भरता बनी वजह, बढ़ेगा महंगाई का ग्राफ

बांग्लादेश अपनी ऊर्जा और ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर है। वर्तमान में चल रहे वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की अनिश्चितता के कारण बांग्लादेश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा था, जिसे संतुलित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल और पेट्रोल महंगा होने से मंडियों तक फल-सब्जियों और खाद्यान्न को लाना महंगा हो जाएगा, जिससे आने वाले दिनों में देश में खुदरा महंगाई दर का ग्राफ तेजी से ऊपर जा सकता है।

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