अनु मीणा सुसाइड केस: 21 दिन बाद भी खाली हाथ रही जयपुर पुलिस, फरार इंजीनियर पति का अब तक सुराग नहीं

 

जयपुर | गुलाबी नगरी के बहुचर्चित अनु मीणा आत्महत्या मामले में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। घटना के संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुए आज पूरे 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जयपुर पुलिस अब तक मुख्य आरोपी इंजीनियर पति और अन्य नामजद दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। तीन हफ्ते का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी किसी भी आरोपी की धरपकड़ न होने से कानून व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं, जिससे आहत होकर अब मृतका के परिजनों ने पुलिस प्रशासन की नीयत और कार्यशैली पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है।

इंसाफ के लिए पीड़ित परिवार अड़ा, अब सीबीआई जांच की उठने लगी मांग

मामले में स्थानीय पुलिस के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अनु मीणा के परिवार का कानून पर से भरोसा डगमगा गया है। परिजनों ने अब साफ शब्दों में इस पूरे संवेदनशील प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग बुलंद कर दी है। उनका कहना है कि मौजूदा जांच व्यवस्था से उन्हें न्याय मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और केवल स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही इस रहस्यमयी मौत का सच सामने ला सकती है। सीबीआई जांच की इस गुहार को लेकर पीड़ित परिवार जल्द ही राजस्थान सरकार के उच्च अधिकारियों और मंत्रियों से मुलाकात कर अपनी बात रखने की रणनीति बना रहा है।

फरार इंजीनियर पति ने वीडियो जारी कर खुद को बताया बेकसूर, पुलिसिया दावों पर उठे सवाल

इस बीच, मामले के मुख्य आरोपी और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पति गौतम मीणा ने करीब दस दिन पहले अज्ञात ठिकाने से एक वीडियो संदेश जारी कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया था। हालांकि, आरोपी पति के पास इस बात का कोई तार्किक जवाब नहीं था कि यदि वह अनु की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं है, तो कानून का सामना करने के बजाय लगातार अंडरग्राउंड क्यों है और पुलिस तफ्तीश में सहयोग क्यों नहीं कर रहा है। आरोपी का इस तरह खुलेआम वीडियो जारी करना और फिर भी पुलिस की पहुंच से दूर रहना, राजस्थान पुलिस के खुफिया तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जगह-जगह दबिश देने का दावा, आरोपियों को जल्द जेल भेजने का आश्वासन

दूसरी ओर, चौतरफा घिरी जयपुर पुलिस ने अपनी सफाई में दावा किया है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए विभिन्न टीमें लगातार सक्रियता से काम कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फरार चल रहे गौतम मीणा और अन्य करीबियों की टोह लेने के लिए संभावित ठिकानों और संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मुखबिरों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सुराग जुटाए जा रहे हैं और बहुत जल्द सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

Leave a Reply