अजमेर का सोनिया सुसाइड केस निकला सोची-समझी हत्या: पुलिस ने पति और ससुर समेत चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

अजमेर | राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद थाना पुलिस ने विवाहिता सोनिया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला पर्दाफाश किया है। आरोपियों द्वारा हत्या की वारदात को सुसाइड का रूप देने की सोची-समझी साजिश को पुलिसिया तफ्तीश ने पूरी तरह नाकाम कर दिया है। इस जघन्य अपराध में मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस ने मृतका के पति, सास, ससुर और ननद को धर-दबोचा है। कोर्ट में पेशी के बाद अदालत के निर्देश पर चारों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

₹10 लाख की मांग और संतान न होने को लेकर शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना

जयपुर के रहने वाले कमल कुमार की बेटी सोनिया की शादी 22 नवंबर 2024 को नसीराबाद के काली माई मोहल्ला निवासी जयंत के साथ संपन्न हुई थी। आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल के लोग उसे कम दहेज मिलने के ताने दे रहे थे। यही नहीं, शादी के 9 महीने गुजर जाने के बावजूद संतान सुख न मिलने की बात कहकर उसे लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल वाले सोनिया पर मायके से ₹10 लाख नकद लेकर आने का लगातार अनुचित दबाव बना रहे थे।

फांसी का रचा स्वांग, लेकिन पिता की सजगता से दर्ज हुआ दहेज हत्या का केस

बीती 28 मई को सोनिया की उसके ससुराल में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। वारदात को अंजाम देने के बाद ससुराल पक्ष ने इसे फांसी लगाकर की गई आत्महत्या करार दिया और मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की। हालांकि, मृतका के पिता को अपनी बेटी की खुदकुशी की बात पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए नसीराबाद थाने में दहेज हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज करवाई, जिसके बाद पुलिस महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया।

फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज, गला घोंटकर दी गई थी मात

जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के दिशा-निर्देशन और प्रशिक्षु आरपीएस सत्यप्रकाश की अगुवाई में गठित विशेष टीम ने मामले की परतें खंगालना शुरू किया। घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल फॉरेंसिक (MOB) और एएफएसएल (AFSL) की रिपोर्ट के साथ-साथ मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने ससुराल वालों के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। रिपोर्ट में यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो गया कि सोनिया की मौत फांसी लगाने से नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या की वजह से हुई थी।

सलाखों के पीछे पहुंचा पूरा ससुराल, साक्ष्य मिटाने की धाराएं भी जुड़ीं

पुलिस उपाधीक्षक कृष्ण कुमार यादव के अनुसार, जब यह पूरी तरह साफ हो गया कि साक्ष्य मिटाने और कानून को गुमराह करने के लिए हत्या को सुसाइड का रूप दिया गया था, तो पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की। मामले में त्वरित एक्शन लेते हुए मृतका के पति जयंत, ससुर सुभाषचंद, सास मंजू देवी और ननद लीना को गिरफ्तार कर लिया गया। माननीय न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए चारों आरोपियों को जेल भेजने का हुक्म जारी किया है।

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