हौजरानी में हर चौखट पर ‘होटल’, न सुरक्षा का इंतजाम और न दमकल के आने का रास्ता

नई दिल्ली | मालवीय नगर के हौजरानी क्षेत्र में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने स्थानीय स्तर पर चल रहे होटलों और गेस्ट हाउसों में सुरक्षा के इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। इस भीषण हादसे में 21 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद मैक्स अस्पताल के पास स्थित तंग गलियों में धड़ल्ले से चल रहे दर्जनों कमर्शियल भवनों पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस इलाके की ज्यादातर इमारतें कागजों पर आवासीय (रहने के लिए) हैं, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इन्हें व्यावसायिक होटलों में तब्दील कर दिया गया है।
संकरी गलियां और एक ही रास्ता बना आफत
इलाके के लोगों के मुताबिक, यहां के अधिकांश होटलों में आने-जाने और बाहर निकलने के लिए केवल एक ही संकरा मार्ग (प्रवेश और निकास द्वार) उपलब्ध है। ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मकान मालिकों ने भवनों के भीतर अस्थायी दीवारें खड़ी करके कमरों की संख्या बढ़ा दी है। इसके कारण किसी भी आपातकालीन स्थिति या हादसे के दौरान लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसके अलावा, इन बहुमंजिला इमारतों में वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) की भारी कमी है और बेहद तंग सीढ़ियां ही एकमात्र रास्ता हैं।
मरीजों की मजबूरी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
दरअसल, पास ही स्थित मैक्स अस्पताल में देशभर से बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए आते हैं। इसी मांग को देखते हुए इस इलाके में होटलों का कारोबार कुकुरमुत्ते की तरह फैल गया। ये होटल संचालक परिजनों से 1,000 से लेकर 5,000 रुपये रोजाना तक का भारी-भरकम किराया वसूलते हैं। मोटी कमाई की लालच में बहुत ही कम जगह के भीतर छोटे-छोटे कमरे बना दिए गए हैं, जिससे फायर सेफ्टी से जुड़े बुनियादी नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
अग्निशमन यंत्रों का अभाव और बेसमेंट में धधकती रसोई
स्थानीय लोगों ने यह भी खुलासा किया है कि इनमें से ज्यादातर इमारतों में न तो आग बुझाने के उपकरण (फायर एक्स्टिंग्विशर) हैं, न फायर बॉक्स और न ही कोई इमरजेंसी एग्जिट डोर बनाया गया है। इतना ही नहीं, कई होटलों के बेसमेंट (तहखाने) में कमर्शियल किचन संचालित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर बड़े हादसों को दावत दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि वेंटिलेशन न होने और इमारतों में कांच का अत्यधिक इस्तेमाल होने की वजह से आग लगने पर जहरीला धुआं बेहद तेजी से फैलता है, जो दम घुटने और मौतों की सबसे बड़ी वजह बनता है।
