लाओस में बंधक बनीं दो बहनें और सांसद का रेस्क्यू मिशन: ‘ऑपरेशन महीसागर 2.0’ से मिला नया जीवन

अहमदाबाद | गुजरात के आणंद जिले की दो बहनों को थाईलैंड और लाओस में फैले एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क से सुरक्षित निकाल लिया गया है। इन दोनों युवतियों को थाईलैंड में एक अच्छी नौकरी का लालच देकर बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें बंधक बना लिया गया। पीड़ितों के परिवार की गुहार पर स्थानीय सांसद और भारतीय दूतावास की मदद से एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बचाव अभियान चलाया गया, जिसके बाद दोनों बहनें अब सुरक्षित हैं।
धोखे से जाल में फंसाया और बनाया बंधक
दोनों बहनों को सुनहरे भविष्य और नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड भेजा गया था। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें अवैध रूप से लाओस ले जाया गया, जहाँ वे अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों के चंगुल में फंस गईं। इस दौरान उनका अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। जब काफी समय तक कोई खबर नहीं मिली और परिवार के सामने सारे रास्ते बंद हो गए, तब उन्होंने मदद के लिए गुहार लगाई। इसके बाद दोनों बेटियों को वापस लाने के लिए 'ऑपरेशन माहीसागर 2.0' की शुरुआत की गई।
सेना की छापेमारी और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय और लाओस स्थित भारतीय दूतावास को तुरंत सक्रिय किया गया। दूतावास के अधिकारियों ने लाओस की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया और गुप्त कूटनीतिक प्रयासों के जरिए युवतियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया। पुख्ता जानकारी मिलते ही लाओस की सेना ने तस्करों के ठिकाने पर अचानक छापा मार दिया। सेना और भारतीय दूतावास के इस संयुक्त सैन्य अभियान ने करीब 20 दिनों से बंधक बनीं दोनों बहनों को सफलतापूर्वक आजाद करा लिया।
सुरक्षित वतन वापसी और सांसद की भूमिका
तस्करों के चंगुल से मुक्त कराई गईं दोनों बहनें अब पूरी तरह सुरक्षित हैं और कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही जल्द ही गुजरात लौट आएंगी। इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में स्थानीय सांसद मितेश पटेल (बकाभाई) की अहम भूमिका रही, जो अपने क्षेत्र में दूसरी बार रिकॉर्ड मतों से जीतकर आए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी अज़रबैजान में फंसे गुजराती युवाओं को बचाने के लिए 'ऑपरेशन माहीसागर' चलाया गया था, और उसी तर्ज पर इस बार भी भारतीय एजेंसियों ने तत्परता दिखाते हुए देश की बेटियों को बचा लिया।
