पटना सिविल कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सरेंडर करने पहुंचे खान सर, पुलिस की मौजूदगी के बावजूद नहीं हो सकी गिरफ्तारी

पटना | चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी स्थानीय पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। कड़े पहरे और कानूनी दबाव के बीच खान सर अब खुद आत्मसमर्पण करने के लिए पटना सिविल कोर्ट पहुंच चुके हैं, जहां अदालती प्रक्रिया के बाद उन्हें जेल भेजा जा सकता है। इससे पहले, शुक्रवार रात से ही उनकी कोचिंग के बाहर शिष्यों और समर्थकों का भारी जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। पुलिस प्रशासन ने शहर की कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से उन्हें जबरन गिरफ्तार करने से परहेज किया और स्थिति पर नजर बनाए रखी।

कक्षाओं का संदेश और पुलिस की अपील

शनिवार सुबह खान सर के संस्थान से जुड़े विद्यार्थियों के मोबाइल पर एक संदेश भेजा गया, जिसमें सुबह 10 से 11 बजे के बीच उनकी क्लास होने की बात कही गई थी। हालांकि, परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने कोई कक्षा नहीं ली और सीधे अदालत की शरण में जाने का फैसला किया। इस बीच, पटना पुलिस ने युवाओं और छात्रों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या कोचिंग संचालकों के उकसावे में न आएं। पुलिस प्रशासन ने पूरी निष्पक्षता से कानूनी जांच करने का भरोसा देते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग मांगा है।

अंगरक्षकों का बयान और फायरिंग का आदेश

खान सर पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने भीड़ को डराने और इलाके में दहशत फैलाने के उद्देश्य से अपने निजी सुरक्षाकर्मियों को गोली चलाने का हुक्म दिया था। हिरासत में लिए गए दोनों अंगरक्षकों ने पुलिस के सामने कुबूल किया है कि कोचिंग के बाहर कुछ उग्र तत्वों द्वारा मारपीट और तोड़फोड़ किए जाने के बाद खान सर ने खुद बाहर आकर उन्हें तुरंत फायरिंग करने का आदेश दिया था। खान सर के कथित निर्देश 'जो होगा मैं समझ लूंगा, अविलंब फायर करो' के बाद ही सुरक्षा गार्डों ने हवा में दो-दो राउंड गोलियां चलाई थीं।

कानूनी धाराएं और संभावित सजा के प्रावधान

इस मामले में पुलिस ने खान सर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में यह सिद्ध हो जाता है कि गोलीबारी खान सर के सीधे आदेश पर हुई थी, तो उन्हें सह-आरोपी के रूप में मुख्य अपराधी जितनी ही सजा भुगतनी पड़ सकती है। इन संगीन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर खान सर को अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है, जिससे उनकी मुश्किलें काफी बढ़ती नजर आ रही हैं।

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