ओ-जोन के विरोध में ग्रामीणों का बड़ा प्रदर्शन, महापंचायत में उठीं कई मांगें

नई दिल्ली। ओल्ड उस्मानपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को ओ-जोन (O-Zone) की श्रेणी से मुक्त कराने के लिए स्थानीय निवासियों का प्रदर्शन अब और उग्र हो गया है। हाल ही में गढ़ी मांडू और ओल्ड उस्मानपुर के ग्रामीणों द्वारा एक विशाल महापंचायत बुलाई गई। इस बैठक में लोगों ने साफ तौर पर कहा कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और वे केवल अपने अधिकारों, मूलभूत सुविधाओं तथा गांव के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। ग्रामीणों का संकल्प है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। इस महापंचायत में क्षेत्र के विधायक अजय महावर भी ग्रामीणों की बात सुनने पहुंचे।

बुनियादी सुविधाओं और ओ-जोन से मुक्ति की मांग

महापंचायत के दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक के समक्ष अपनी प्रमुख समस्याओं को रखा। उनकी मुख्य मांगों में गांव को ओ-जोन के दायरे से बाहर करना, घरों में बिजली के मीटर लगवाना, पक्के रास्तों का निर्माण और यमुना नदी के किनारे एक मजबूत सुरक्षा बांध बनाना शामिल है। निवासियों का आरोप है कि ओ-जोन की पाबंदियों की वजह से पिछले कई वर्षों से इलाके में कोई विकास कार्य नहीं हो पाया है, जिससे वे बेहद साधारण सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं।

विधायक का आश्वासन और विकास योजनाओं की घोषणा

विधायक अजय महावर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि वह विधानसभा में लगातार इस क्षेत्र की आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सोनिया विहार जैसे इलाकों में बांध और विकास कार्य हो सकते हैं, तो वजीराबाद रोड से शास्त्री पार्क तक भी सुरक्षा बांध का निर्माण बिल्कुल संभव है। विधायक ने जानकारी दी कि इसके लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल चुके हैं और दोनों गांवों में सड़क, नालियों तथा सुरक्षा बांध के निर्माण के लिए करीब 15 करोड़ रुपये का फंड भी मंजूर करा लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे तय सीमा में रहें, नया अतिक्रमण न करें और क्षेत्र में एसिड या डाई जैसी प्रदूषण फैलाने वाली अवैध फैक्ट्रियां न चलाएं।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया और उम्मीदें

विधायक के इस भरोसे और नई घोषणाओं के बाद ग्रामीणों के बीच सकारात्मक माहौल देखा गया। स्थानीय निवासी राकेश कुमार ने बताया कि ओ-जोन की वजह से वर्षों से विकास ठप है और सरकार को अब इसका कोई पक्का इलाज ढूंढना चाहिए। वहीं, सुनील गुर्जर का कहना था कि यह कोई सियासी जंग नहीं है, वे बस इतना चाहते हैं कि उनके आशियाने सुरक्षित रहें और गांव को इस पाबंदी से राहत मिले। करण डेढ़ा सहित अन्य ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस बार ये घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि जल्द ही धरातल पर काम शुरू होगा जिससे उनकी पुरानी समस्याओं का अंत हो सकेगा।

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