आर्डी ग्रुप विवाद में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, मध्यस्थता प्रक्रिया अपनाने पर जोर

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिवंगत रियल एस्टेट कारोबारी अशोक वर्मा के परिजनों के बीच बरसों से चले आ रहे एक आपराधिक मामले (प्राथमिकी/FIR) को पूरी तरह से बंद करने का ऐतिहासिक निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने आर्डी ग्रुप (Ardee Group) और उससे जुड़ी पारिवारिक चल-अचल संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर उपजे गंभीर मतभेदों को सुलझाने के लिए आपसी मध्यस्थता समझौते को कड़ाई से लागू करने का आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की खंडपीठ ने इस जटिल मामले में मध्यस्थता प्रक्रिया के जरिए हुई प्रगति की सराहना की। पीठ ने विवाद से जुड़े सभी पक्षों को न्यायालय की देखरेख में तैयार किए गए सुलह फॉर्मूले की शर्तों का पूरी तरह पालन करने का निर्देश दिया है।
पूर्व न्यायाधीश की मध्यस्थता से सुलझा कई पीढ़ियों का विवाद
रियल एस्टेट क्षेत्र के इस नामचीन घराने का यह विवाद कई सालों से देश के विभिन्न कानूनी मंचों और अदालतों में व्यापक मुकदमेबाजी का कारण बना हुआ था। इस हाईप्रोफाइल जंग में मुख्य रूप से स्वर्गीय अशोक वर्मा की दो बेटियां शेफाली वर्मा और शिबानी वर्मा कपूर आमने-सामने थीं, जहां पारिवारिक व्यापारिक हितों के साथ-साथ करोड़ों रुपये की रियल एस्टेट संपत्तियों के बंटवारे को लेकर तीखी तकरार चल रही थी। इस बड़े गतिरोध को दूर करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने निभाई। सर्वोच्च अदालत ने दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशने के लिए उन्हें विशेष मध्यस्थ नियुक्त किया था, जिनकी कुशल देखरेख में आखिरकार इस बहुप्रतीक्षित समझौते का रास्ता साफ हो सका।
फरवरी 2026 में हुआ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई कार्यवाही के विवरण के अनुसार, मध्यस्थ न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने इस साल की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण अंतरिम रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में बेहद सकारात्मक जानकारी देते हुए बताया गया कि दोनों पक्षों ने आपसी संवाद और मध्यस्थता के जरिए अपने तमाम बड़े और बुनियादी मतभेदों को पूरी तरह से खत्म कर लिया है। इसी सिलसिले में आगामी 5 फरवरी, 2026 को सभी संबंधित पक्षों द्वारा एक अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं। मध्यस्थ ने अदालत को अवगत कराया कि इस व्यापक समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन) और बाकी बची कानूनी औपचारिकताओं को मुकम्मल करने के लिए थोड़े और समय की दरकार होगी, जिसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आवश्यक समय सीमा मंजूर कर ली।
दशकों पुराने व्यापारिक उत्तराधिकार के इतिहास में बड़ी कामयाबी
कानूनी और व्यावसायिक क्षेत्रों में इस पूरे घटनाक्रम को आर्डी ग्रुप से जुड़े देश के सबसे चर्चित और पेचीदा पारिवारिक व्यापारिक विवादों के पटाक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। इस लंबी और खर्चीली मुकदमेबाजी के कारण कई अदालती मंचों पर एक साथ समानांतर कार्रवाइयां चल रही थीं, जिससे दशकों से अर्जित की गई मूल्यवान पारिवारिक संपत्तियों का प्रबंधन, संचालन और उत्तराधिकार का ढांचा पूरी तरह प्रभावित हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम हस्तक्षेप के बाद न सिर्फ एक बड़े बिजनेस एम्पायर का भविष्य सुरक्षित हुआ है, बल्कि लंबे समय से लंबित मुकदमों के बोझ को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है।
