‘निराशाजनक और निंदनीय व्यवहार हुआ’— शिवचंद्र राम के पक्ष में बोले तेज प्रताप यादव

पटना। बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर का अंतर्विरोध खुलकर सतह पर आ गया है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने संगठन की सभी जिम्मेदारियों से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतृत्व ने उन्हें उच्च सदन भेजने का भरोसा दिया था, लेकिन आखिरी वक्त पर उनका टिकट काट दिया गया। शिवचंद्र राम के इस बगावती कदम के बाद अब लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी उनके पक्ष में आ खड़े हुए हैं।
तेज प्रताप ने किया समर्थन और प्रेस कॉन्फ्रेंस में छलके शिवचंद्र के आंसू
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर शिवचंद्र राम का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने लिखा कि शिवचंद्र राम का पार्टी के पदों से इस्तीफा देना अत्यंत पीड़ादायक है। वर्षों तक संगठन और समाज को सींचने वाले नेता का उचित सम्मान होना चाहिए था, उनके साथ जो हुआ वह निंदनीय है। इससे पहले सोमवार को महागठबंधन के उम्मीदवार सुनील सिंह के नामांकन के बाद शिवचंद्र राम का दर्द सरेआम छलक पड़ा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे फूट-फूटकर रोने लगे और कहा कि पार्टी के धोखे के कारण वे कई रातों से सो नहीं पाए हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्होंने केवल एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, वे पार्टी के सक्रिय सदस्य बने रहेंगे। इस सियासी ड्रामे के बीच तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
टिकट न मिलने से दलित समाज की उपेक्षा और अंदरूनी नाराजगी का दावा
विधान परिषद चुनाव के लिए आरजेडी के संभावित दावेदारों में शिवचंद्र राम का नाम सबसे आगे चल रहा था। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि जेडीयू और बीजेपी द्वारा किसी दलित को टिकट न दिए जाने के बाद तेजस्वी यादव इस वर्ग को साधने के लिए शिवचंद्र राम को मौका दे सकते हैं। अंतिम सूची से नाम गायब होने के बाद शिवचंद्र राम ने आरजेडी नेतृत्व को लिखे पत्र में कहा कि इस फैसले से पूरे रविदास और दलित समाज में भारी मायूसी है। उन्होंने पार्टी से मांग की कि विधान परिषद और राज्यसभा के टिकट बंटवारे में दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की आनुपातिक हिस्सेदारी तय करने के लिए एक ठोस और पारदर्शी नीति बनाई जानी चाहिए।
लालू परिवार का जताया आभार और पार्टी के प्रति वफादारी का हवाला
इस गहरी नाराजगी के बावजूद शिवचंद्र राम ने अपने त्यागपत्र में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि उनके दिल में नेतृत्व के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है, लेकिन कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान की खातिर पद छोड़ना उनकी नैतिक मजबूरी थी। गौरतलब है कि शिवचंद्र राम साल 1990 से ही लालू यादव की विचारधारा और आरजेडी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पार्टी के हर अच्छे-बुरे दौर में गांव-गांव जाकर संगठन के आधार को मजबूत किया था। यही वजह है कि अचानक दरकिनार किए जाने के बाद उनके समर्थक बेहद आक्रोशित नजर आ रहे हैं।
