गजेंद्र सिंह शेखावत का बड़ा बयान, कहा- डर मेरे खून में नहीं

जयपुर: राजस्थान की राजनीति में दिग्गज नेताओं के बीच बयानों के तीर एक बार फिर चलने शुरू हो गए हैं। केंद्रीय कला और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अब तक का सबसे तीखा पलटवार किया है। शेखावत ने सीधे लहजे में कहा, "गहलोत जी, अगर मैं न होता तो आपकी राजनीति ही खत्म हो जाती।" इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि डर जैसी चीज उनके खून में ही नहीं है।
दरअसल, दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तब शुरू हुई जब गजेंद्र सिंह शेखावत ने अशोक गहलोत पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट का रास्ता रोकने का आरोप लगाया था। इस पर पलटवार करते हुए गहलोत ने शेखावत को 'डरा हुआ आदमी' बताया था और कहा था कि पता नहीं कब उनकी केंद्रीय मंत्री पद से छुट्टी हो जाए। अब इसी बयान पर शेखावत ने गहलोत को आड़े हाथों लिया है।
"डर मेरे खून में नहीं, आपको अप्रासंगिक होने का भय"
अशोक गहलोत के बयान का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा:
"मैं पूज्य वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा का अनुयायी हूं गहलोत जी, डर मेरे खून में नहीं है। आपको तो उल्टे अपने अप्रासंगिक हो जाने का भय सताता रहता है, इसलिए आप लगातार मेरे खिलाफ बोलते रहते हैं। सच तो यह है कि मैं न होता, तो आपकी राजनीति ही खत्म हो जानी थी।"
सत्ता लोलुपता और चाटुकारिता का लगाया आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री पर अपना हमला जारी रखते हुए शेखावत ने आगे लिखा कि वे गहलोत की तरह किसी 'एक परिवार' (गांधी परिवार) के सेवक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत का पूरा राजनीतिक जीवन हमेशा पद लोलुपता और सत्ता से चिपके रहने का गवाह रहा है, इसलिए उन्हें गहलोत से किसी भी तरह के 'सर्टिफिकेट' की जरूरत नहीं है। शेखावत ने कहा कि गहलोत केवल जनता का ध्यान भटकाने की राजनीति करते हैं, जबकि वे खुद जनसेवा के संकल्प पर अडिग हैं और समय आने पर सबको जवाब मिल जाएगा।
सचिन पायलट के नाम पर शुरू हुआ था विवाद
इस ताजा सियासी घमासान की शुरुआत बीती 6 जून को जोधपुर में हुई थी। वहां मीडिया से बातचीत के दौरान गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा था कि अशोक गहलोत पश्चिम बंगाल की राजनीति का बहाना बनाकर राजस्थान के 'पुराने जिन्न' को बोतल से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। शेखावत ने दावा किया था कि जब भी कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट को कोई बड़ा पद या नई जिम्मेदारी देने के बारे में सोचता है, अशोक गहलोत तुरंत पायलट का रास्ता रोकने के लिए कोई न कोई नया पैंतरा या जिन्न बाहर ले आते हैं। इसी बयान के बाद से राजस्थान से लेकर दिल्ली तक दोनों नेताओं के बीच सियासी तलवारें खिंच गई हैं।
