याकूब खाकी की तलाश जारी, जयपुर ब्लास्ट केस में पुलिस पर भी गिरी गाज

जयपुर। राजस्थान की राजधानी के खोह नागोरियान क्षेत्र में संचालित एक अवैध पटाखा कारखाने में भड़की भीषण आग के बाद जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस हृदयविदारक हादसे में एक मासूम बच्चे तथा दो सगे भाइयों सहित कुल आठ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस दर्दनाक घटनाक्रम के बाद स्थानीय पुलिस अब अवैध बारूद के इस पूरे अंतर्राज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। हादसे के बाद से फरार चल रहे मुख्य कारखाना संचालक फिरोज और भवन स्वामी याकूब की धरपकड़ के लिए पुलिस ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो दिल्ली, फर्रुखाबाद सहित कई संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।
खोह नागोरियान थाने के दो पुलिसकर्मी सस्पेंड, दिल्ली से जुड़ा था बारूद का कनेक्शन
इस गंभीर लापरवाही पर प्रशासनिक चाबुक चलते हुए डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने खोह नागोरियान थाने के एक एएसआई (सहायक उपनिरीक्षक) और एक हेड कांस्टेबल को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस के शुरुआती अनुसंधान में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि मुख्य आरोपी फिरोज दिल्ली से अवैध रूप से बारूद और प्रतिबंधित आतिशबाजी सामग्री की खेप मंगवाता था, जिसके बाद जयपुर के इस घनी आबादी वाले इलाके में उसकी री-पैकेजिंग और असेंबलिंग का काम धड़ल्ले से किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि यह मकान घाटगेट निवासी दो भाइयों याकूब और कय्यूम का है, जिसे पिछले छह वर्षों से फिरोज को किराए पर दिया गया था। कारखाने में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बिजली का कनेक्शन भी दौड़ाया जा रहा था।
दिल्ली में हुई सख्ती तो जयपुर को बनाया नया अड्डा, थाने के पास चल रहा था मौत का खेल
स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में अवैध पटाखा निर्माण पर कानूनी शिकंजा कसने के बाद मुख्य आरोपी फिरोज और उसके जोड़ीदार वसीम ने जयपुर के इस इलाके को अपना नया सेफ हाउस और संचालन केंद्र बना लिया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खोह नागोरियान पुलिस स्टेशन से महज एक किलोमीटर की हवाई दूरी पर यह जानलेवा अवैध इकाई पिछले दो सालों से बेखौफ चल रही थी। मात्र 55 वर्ग गज के एक संकरे मकान में भारी मात्रा में खतरनाक बारूद और विस्फोटक का अवैध भंडारण किया गया था। हादसे के तुरंत बाद एक्शन में आई पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने उसी इलाके में चल रही एक और अवैध पटाखा फैक्ट्री को चिन्हित कर सील कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में अवैध बारूद माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।
एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य, प्रशासनिक मिलीभगत की भी होगी विस्तृत जांच
हादसे की वास्तविक वजह तलाशने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की विशेष टीम ने घटनास्थल से बारूद के अवशेष और अन्य वैज्ञानिक नमूने संकलित किए हैं। प्राथमिक तौर पर अंदेशा है कि काम के दौरान किसी चिंगारी या धूम्रपान की लापरवाही की वजह से बारूद के ढेर ने आग पकड़ी होगी, जिसकी आधिकारिक पुष्टि एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस प्रशासन की जांच सिर्फ आग के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इस बिंदु पर भी पैनी तफ्तीश की जा रही है कि इतनी बड़ी आबादी के बीच बिना किसी सुरक्षा मानक के यह मौत का धंधा किसकी शह पर फल-फूल रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और कुछ रसूखदारों की संलिप्तता को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
